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फतेहपुर में अवैध खनन का दिनदहाड़े जेसीबी से तालाब की खुदाई

सरकारी तालाब पर मिट्टी माफिया सक्रिय, प्रधान प्रतिनिधि पर आरोप

राजस्व को नुकसान, प्रशासन पर उठे सवालकार्रवाई का इंतजार

सरकारी तालाब पर अवैध खनन? वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

(ललौली थाना क्षेत्र, बरौंहा गांव):
जनपद में अवैध खनन का एक और मामला सामने आया है, जहां सरकारी तालाब से दिनदहाड़े मिट्टी खनन किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामला ललौली थाना क्षेत्र के बरौंहा गांव स्थित खैराड़ी तालाब का बताया जा रहा है।

फतेहपुर (मलवाँ), संवाददाता सूरज सिंह
प्रदेश सरकार द्वारा खनन माफिया और बालू माफियाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावों के बीच फतेहपुर जनपद से अवैध मिट्टी खनन का एक नया मामला सामने आया है। मामला थाना ललौली क्षेत्र के बरौहा गांव स्थित खैराड़ी तालाब का बताया जा रहा है, जहां सरकारी तालाब से दिनदहाड़े अवैध तरीके से मिट्टी खुदाई किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि एक प्रधान प्रतिनिधि की देखरेख में दो जेसीबी मशीनों और करीब 10 ट्रैक्टरों के जरिए तालाब से लगातार मिट्टी निकाली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य बिना मानक और बिना अनुमति के किया जा रहा है, जिससे सरकारी तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

ग्रामीणों के मुताबिक सरकार जहां एक ओर जल संरक्षण और तालाबों की सुरक्षा को लेकर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आरोप है कि तालाब से निकाली जा रही मिट्टी की बिक्री भी खुलेआम की जा रही है, जिससे राजस्व को भी भारी क्षति हो रही है।

मामले को लेकर लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक जैसे सख्त अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद यदि दिनदहाड़े इस तरह अवैध खनन हो रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अब वायरल वीडियो सामने आने के बाद लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

क्षेत्र में चर्चा है कि क्या बिना अनुमति सरकारी तालाब पर चल रही जेसीबी मशीनों को सीज किया जाएगा, क्या कथित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी या फिर मामला प्रभावशाली लोगों के दबाव में ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह मामला एक बार फिर सरकारी तालाबों की सुरक्षा, अवैध खनन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

तालाब और जल स्रोत केवल सरकारी जमीन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। अवैध खनन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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