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हाईकोर्ट के आदेश के बाद देवरी जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा, फर्जी जांच रिपोर्ट बनाने के आरोप।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद देवरी जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा, फर्जी जांच रिपोर्ट बनाने के आरोप।

जमीनी स्तर पर अधूरे पड़े कार्यों को रिपोर्ट में बताया पूर्ण, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप।

Madhya Pradesh के Sagar जिले की देवरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जम्नापुर परसिया में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुए खुलासे ने पंचायत और जनपद स्तर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में कई विकास कार्य केवल कागजों में पूर्ण दिखाकर राशि निकाल ली गई, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरे पड़े हैं या कई स्थानों पर कार्य शुरू तक नहीं हुआ।

मामले में सबसे गंभीर आरोप जनपद पंचायत अधिकारियों पर लगे हैं, जिन पर फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर वास्तविक स्थिति को छिपाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जिन कार्यों को पूर्ण बताया गया, मौके पर जाकर देखने पर उनकी स्थिति बिल्कुल अलग मिली।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में नाली निर्माण, नाली ढकाव कार्य, पुलिया निर्माण, नाडेप की सफाई, सोकपिट गड्ढा निर्माण, फिल्ड तालाब निर्माण सहित कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। इसके बावजूद पंचायत और जनपद स्तर की रिपोर्ट में सभी कार्यों को पूर्ण दर्शा दिया गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन धरातल पर उसका लाभ जनता को नहीं मिला। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
नाली निर्माण के नाम पर बड़ा खेल।

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में सबसे प्रमुख मामला बीरेंद्र हजारी के घर से नाले तक बनने वाली नाली का है। ग्रामीणों का कहना है कि इस नाली निर्माण कार्य को सरकारी रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में पूर्ण बताया गया है, जबकि मौके पर कोई नाली बनी ही नहीं है।

इसी प्रकार दुबे के घर से नाले तक नाली निर्माण कार्य को भी रिपोर्ट में पूरा दर्शाया गया, लेकिन वास्तविकता में वहां निर्माण कार्य नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित कार्यों के नाम पर राशि निकाल ली गई, लेकिन काम जमीन पर दिखाई नहीं देता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए तो कई और ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जिनमें केवल कागजों पर निर्माण कार्य पूरे कर भुगतान ले लिया गया।

ग्रामीणों ने लगाए फर्जी हस्ताक्षर कराने के आरोप
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर फर्जी हस्ताक्षर कराने के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों को दबाने और मामले को खत्म कराने के लिए कुछ लोगों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर किए गए।

ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने अधूरे कार्यों की शिकायत की तो पंचायत स्तर पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। कई लोगों का आरोप है कि बिना जानकारी के उनके नाम शिकायत वापसी या संतुष्टि पत्र में जोड़ दिए गए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि हस्ताक्षरों की जांच कराई जाए और यदि फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद खुली पोल
बताया जा रहा है कि मामले की शिकायत हाईकोर्ट तक पहुंची थी, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया तेज हुई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब मामले की वास्तविक स्थिति सामने आई तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए।

ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के दौरान अधिकारियों ने मौके पर सही निरीक्षण नहीं किया और बिना वास्तविक स्थिति देखे ही रिपोर्ट तैयार कर दी। यही कारण है कि अधूरे और गायब कार्यों को भी पूर्ण बता दिया गया।

अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय स्तर पर पंचायत और जनपद अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्राम पंचायत जम्नापुर परसिया के ग्रामीणों में पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में भी इसी प्रकार विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग होता रहेगा।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों, सरपंच और सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जनपद पंचायत अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी नियमित निरीक्षण करते तो अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिना सत्यापन किए ही भुगतान प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

अब देखना होगा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला जांच तक सीमित रह जाता है।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी टीम से जांच कराई जाए और प्रत्येक निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन किया जाए। साथ ही पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और मस्टर रोल की भी जांच की जाए।

लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पंचायत स्तर पर हुए बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

Aima मीडिया नेटवर्क सागर से
सोनू्र प्रजीपति रिपोर्ट
Mob 7582995977

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