"संदेशखाली केस में पीड़िताओं से सबूत मांगने वाली बंगाल की महिला IPS फिर विवादों में, पहले भी असंवेदनशीलता के लगे थे आरोप"
"संदेशखाली केस में पीड़िताओं से सबूत मांगने वाली बंगाल की महिला IPS फिर विवादों में, पहले भी असंवेदनशीलता के लगे थे आरोप"
*कोलकाता।* पश्चिम बंगाल कैडर की एक महिला IPS अफसर इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। यह वही अधिकारी हैं जिन पर संदेशखाली रेप केस की पीड़ित महिलाओं के साथ असंवेदनशीलता बरतने के आरोप लगे थे। संदेशखाली मामले में पीड़िताओं से सबूत मांगने के बाद वह पहले भी विवादों में आ चुकी हैं। अब एक बार फिर वह नए विवाद को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं।
*संदेशखाली केस से जुड़ा है मामला*
संदेशखाली में महिलाओं के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न के मामले की जांच के दौरान इस IPS अफसर की भूमिका पर सवाल उठे थे। आरोप है कि उन्होंने पीड़िताओं से ही घटना के सबूत मांग लिए थे, जिसके बाद उनकी कार्यशैली को लेकर भारी आलोचना हुई थी। पीड़ित महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने अफसर पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।
*फिर क्यों चर्चा में आईं IPS अफसर*
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में एक अन्य मामले में उनके द्वारा लिए गए फैसले को लेकर फिर से विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि अभी इस नए मामले की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन संदेशखाली केस के बाद यह दूसरा मौका है जब महिला IPS अफसर विवादों में घिरी हैं।
*विपक्ष ने साधा निशाना*
संदेशखाली मामले में IPS अफसर की भूमिका को लेकर विपक्ष पहले से ही ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के बजाय आरोपियों को बचा रही है। अब अफसर के फिर विवादों में आने के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और मौका मिल गया है।
*पुलिस मुख्यालय की चुप्पी*
इस पूरे मामले पर अभी तक पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। IPS अफसर ने भी नए विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
फिलहाल बंगाल में इस महिला IPS अफसर का नाम फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।