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पीएम की 'सोना त्याग' अपील पर भड़का स्वर्णकार समाज; विनोद वर्मा ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

( विशेष समाचार रिपोर्ट ) पटना बिहार।

"आभूषण वर्ल्ड" के चीफ एडिटर और स्वर्णकार समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद वर्मा का बड़ा बयान: "यह करोड़ों परिवारों की आजीविका पर वज्रपात है"

राजनीतिक और व्यापार ब्यूरो | [पटना] प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के उद्देश्य से देशवासियों से एक साल तक सोना और जेवर न खरीदने की अपील ने स्वर्ण शिल्पकारों और आभूषण व्यापारियों में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस विवादास्पद अपील के विरोध में स्वर्णकार समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं 'आभूषण वर्ल्ड' के मुख्य संपादक विनोद वर्मा ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसे न केवल आर्थिक रूप से गलत, बल्कि भारत की सांस्कृतिक परंपराओं पर सीधा प्रहार बताया है।

आजीविका का संकट: करोड़ों कारीगरों के भविष्य पर सवाल'आभूषण वर्ल्ड' के माध्यम से अपनी बात रखते हुए विनोद वर्मा ने कहा कि भारत का स्वर्ण उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा सूक्ष्म और लघु उद्योग है। उन्होंने चेतावनी दी, "प्रधानमंत्री की एक अपील से देश के करोड़ों स्वर्णकार, हस्तशिल्प कलाकार और छोटे व्यापारी रातों-रात भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। सोना खरीदना केवल निवेश नहीं है, यह एक परंपरा है जिससे लाखों घर चलते हैं। क्या सरकार ने इन कारीगरों के लिए किसी वैकल्पिक रोजगार का रोडमैप तैयार किया है?

"विदेशी मुद्रा बनाम आम आदमी की सुरक्षा विनोद वर्मा ने तार्किक प्रहार करते हुए कहा कि सरकार अपनी राजकोषीय विफलताओं और डॉलर की बढ़ती कीमत का ठीकरा आम जनता के सिर पर नहीं फोड़ सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विदेशी मुद्रा बचानी है, तो सबसे पहले उन अनावश्यक विलासिता की वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता जिनका इस्तेमाल केवल उच्च वर्ग करता है? सोने को निशाना बनाना सीधे तौर पर मध्यम वर्ग की उस 'इमरजेंसी सेविंग' पर हमला है जो मुसीबत में उनके काम आती है।



स्वर्णकार समाज की 5 प्रमुख मांगें और विरोध के तर्क:

1. अपील की वापसी: सरकार इस आधारहीन अपील को तुरंत वापस ले जिससे बाजार में डर का माहौल बना है।

2. सेक्टर की सुरक्षा: ज्वेलरी सेक्टर को 'संकटग्रस्त उद्योग' घोषित करने के बजाय उसे प्रोत्साहित किया जाए।

3. कारीगरों का बीमा: यदि मांग घटती है, तो सरकार करोड़ों स्वर्णकार कारीगरों के लिए विशेष भत्ते की घोषणा करे।

4. नीतिगत स्पष्टता: विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने के बजाय अन्य गैर-जरूरी आयातों पर नियंत्रण लगाया जाए।

5. सांस्कृतिक सम्मान: शादियों के सीजन में ऐसी अपील करना करोड़ों परिवारों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

आंदोलन की रूपरेखा: एक साल का 'प्रतिरोध काल'

प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद वर्मा ने स्पष्ट किया कि स्वर्णकार समाज खामोश नहीं बैठेगा। उन्होंने घोषणा की है कि अगले एक साल तक प्रदेश के हर जिले और कस्बे में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। 'आभूषण वर्ल्ड' इस अभियान के तहत देशभर के ज्वैलर्स को एकजुट करेगा और सरकार की इन नीतियों का पर्दाफाश करेगा।



"सरकार को याद रखना चाहिए कि सोना भारतीय समाज की रीढ़ है। हम इस तुगलकी फरमान के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक की लड़ाई लड़ेंगे और अपने समाज के हितों के साथ समझौता नहीं करेंगे।" विनोद वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष (स्वर्णकार समाज) एवं मुख्य संपादक (आभूषण वर्ल्ड)

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