पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता के करीबी सहयोगी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
भाजपा नेता ने दावा किया है कि यह हत्या एक पूर्व नियोजित साजिश यानी प्रीमेडिटेटेड हमला था, जिसे संगठित तरीके से अंजाम दिया गया। सुझय कुमार डे ने आरोप लगाया कि हमलावर कई मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए थे और उन्होंने बेहद नजदीक से चंद्रनाथ रथ पर गोलियां चलाईं। उनके अनुसार, घटना उस समय हुई जब रथ कार से यात्रा कर रहे थे। डे का दावा है कि हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग नहीं की, बल्कि विशेष रूप से चंद्रनाथ रथ को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि घटना के समय वाहन में के ड्राइवर भी मौजूद थे, लेकिन हमलावरों ने केवल भाजपा नेता के निजी सहायक को ही गोली मारी। भाजपा नेता का कहना है कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि हमला योजनाबद्ध था और हमलावरों का लक्ष्य पहले से तय था। सुझय कुमार डे ने यह भी आरोप लगाया कि इस हमले का उद्देश्य क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करना था। उन्होंने दावा किया कि पूरी घटना राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती है और राज्य में विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा नेताओं ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो () से कराने की मांग तेज कर दी है। साथ ही पार्टी ने राज्यभर में अपने नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग उठाई है।हालांकि, अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीमें मामले की जांच में जुटी हुई हैं। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से बरामद सबूत, गोलीबारी के पैटर्न और हमलावरों की गतिविधियों का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वहीं दूसरी ओर, इस घटना ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर बहस को और अधिक तीखा बना दिया है।