"RTI में राष्ट्रपति सचिवालय का जवाब- 'आजादी के दस्तावेज उपलब्ध नहीं', नागरिकों ने पूछा- देश का असली इतिहास कहां है?"
*"RTI में राष्ट्रपति सचिवालय का जवाब- 'आजादी के दस्तावेज उपलब्ध नहीं', नागरिकों ने पूछा- देश का असली इतिहास कहां है?"*
नई दिल्ली। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत राष्ट्रपति सचिवालय से भारत की आजादी और शासन व्यवस्था से जुड़े कुछ ऐतिहासिक सवाल पूछे गए। जवाब में राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि "ऐसी कोई सूचना इस सचिवालय में उपलब्ध नहीं है।" इसके बाद देश के इतिहास और दस्तावेजों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
*RTI में पूछे गए थे ये 5 बड़े सवाल*
1. *भारत वास्तव में किस तारीख को आजाद हुआ* - 15 अगस्त 1947 को या 21 अक्टूबर 1943 को?
2. *यदि 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली* तो उसका प्रमाणित कानूनी दस्तावेज, अधिनियम, समझौता या सरकारी रिकॉर्ड क्या है?
3. *आज भारत में शासन किसका चल रहा है* - पूर्ण स्वतंत्र भारतीय शासन या किसी विदेशी कानूनी व्यवस्था की निरंतरता?
4. *1 के नोट पर Finance Secretary के हस्ताक्षर* किस कानून, आदेश या अधिनियम के आधार पर किए जाते हैं?
5. *वह अधिकार किस दस्तावेज से प्राप्त हुआ* और उसकी प्रमाणित प्रति कहां है?
*राष्ट्रपति सचिवालय का जवाब*
इन सभी सवालों के जवाब में राष्ट्रपति सचिवालय ने लिखित में दिया कि "ऐसी कोई सूचना इस सचिवालय में उपलब्ध नहीं है।"
*जनता के सामने खड़े हुए नए सवाल*
इस जवाब के बाद नागरिकों ने सवाल उठाए हैं:
1. *देश के इतिहास के मूल दस्तावेज कहां हैं?*
2. *जनता को प्रमाण क्यों नहीं दिखाए जाते?*
3. *शासन, मुद्रा और अधिकार जिन दस्तावेजों के आधार पर चल रहे हैं, उनका रिकॉर्ड किसके पास है?*
4. *क्या जनता सिर्फ किताबों में लिखा इतिहास पढ़े या दस्तावेजों में दर्ज सत्य भी देखे?*
*"लोकतंत्र में जनता मालिक है"*
RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार मालिक नहीं होती, जनता मालिक होती है। मालिक को अपने देश के इतिहास, कानून, शासन और आर्थिक व्यवस्था के हर प्रमाण को जानने का संवैधानिक अधिकार है।
*"सवाल पूछो, प्रमाण मांगो"*
नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे RTI लगाकर प्रमाणित दस्तावेज मांगें, रिकॉर्ड मांगें, कानून पढ़ें और बिना दस्तावेज किसी बात को अंतिम सत्य न मानें। "जो नागरिक सवाल पूछना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे अपने अधिकार खो देता है।"
*बहस का मुद्दा बना 21 अक्टूबर 1943*
21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार की स्थापना की थी। इसी तारीख को लेकर अब आजादी की तारीख पर नई बहस शुरू हो गई है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सरकार से दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
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