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"200 साल पुराने 310 मकान 0-जोन बताकर तोड़े जा रहे, लोगों का सवाल- 'क्या संत परमानंद हॉस्पिटल 0-जोन में नहीं आता?'"

*"200 साल पुराने 310 मकान 0-जोन बताकर तोड़े जा रहे, लोगों का सवाल- 'क्या संत परमानंद हॉस्पिटल 0-जोन में नहीं आता?'"*

*दिल्ली।* यमुना किनारे बसे 200 साल पुराने मकानों पर बुलडोजर चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि ये मकान 0-जोन में आते हैं, इसलिए तोड़े जा रहे हैं। अब स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर गरीबों के 310 मकान 0-जोन में हैं तो क्या संत परमानंद हॉस्पिटल 0-जोन में नहीं आता? क्या हॉस्पिटल भी तोड़ा जाएगा?

*200 साल पुरानी बस्ती पर कार्रवाई*
यमुना के किनारे बसी इस बस्ती में लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं। कई मकान 200 साल से भी ज्यादा पुराने बताए जा रहे हैं। अब प्रशासन ने इन्हें 0-जोन का हवाला देकर तोड़ना शुरू कर दिया है। अब तक 310 मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।

*लोगों में आक्रोश, उठाए सवाल*
बेघर हो रहे लोगों का कहना है कि जब कार्रवाई हो रही है तो सब पर एक जैसी होनी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाया कि "जब हमारे 200 साल पुराने मकान 0-जोन में हैं तो संत परमानंद हॉस्पिटल 0-जोन में क्यों नहीं आता? अगर नियम सबके लिए बराबर है तो क्या हॉस्पिटल भी तोड़ा जाएगा?"

*"गरीबों के घर, अमीरों को छूट?"*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई सिर्फ गरीबों के मकानों पर हो रही है। बड़े संस्थानों को छूट दी जा रही है। लोगों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि यमुना किनारे कई बड़े निर्माण हैं, लेकिन बुलडोजर सिर्फ झुग्गी-झोपड़ी और पुराने मकानों पर चल रहा है।

*प्रशासन का पक्ष आना बाकी*
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि 0-जोन की परिभाषा क्या है और संत परमानंद हॉस्पिटल इसके दायरे में आता है या नहीं।

*310 परिवार बेघर*
कार्रवाई के चलते 310 परिवार बेघर हो गए हैं। बरसात के मौसम में लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग की है।

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