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जंगलों में वन विभाग ने बनवाये 22 चेकडैम, 21 तालाब और 15 डोभा

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर वन विभाग ने पलामू के सुदूरवर्ती जंगलों में जंगली जानवरों को पानी उपलब्ध कराने के लिए चेकडैम, तालाब और डोभा का निर्माण कराया है. इसका उद्देश्य गर्मी के मौसम में वन्यजीवों को जंगल में ही पीने का पानी उपलब्ध कराना है. साथ ही आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर को भी बनाये रखना है. वन विभाग ने पलामू में 22 चेकडैम, 21 तालाब और 15 डोभा का निर्माण कराया है. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जंगलों में जलस्रोत विकसित होने से जंगली जानवर पानी की तलाश में शहर या ग्रामीण क्षेत्रों की ओर नहीं जायेंगे. इससे आम लोगों के जनजीवन पर पड़ने वाला प्रभाव भी कम होगा. अधिकारियों के अनुसार एक डोभा के निर्माण पर लगभग 95 हजार रुपये खर्च किये गये हैं. डोभा ऐसे स्थानों पर बनाये गये हैं, जहां प्राकृतिक जलस्रोत मौजूद हैं या जल संचय की संभावना है. इन जलस्रोतों को चौड़ा कर पानी संग्रहण की क्षमता बढ़ायी गयी है. वहीं एक चेकडैम के निर्माण पर करीब नौ लाख 66 हजार रुपये खर्च हुए हैं. चेकडैम 200 फीट लंबा, 70 फीट चौड़ा, 50 फीट गहरा और 20 फीट ऊंचा बनाया गया है. जिन क्षेत्रों में कराया गया निर्माण वन विभाग के अनुसार डालटनगंज वनरोपण क्षेत्र के गोरे, बभंडी, बांदुबार, सरैया, मारीभांग और आरागड़ा में निर्माण कराया गया है. पाटन वनरोपण क्षेत्र के उदयपुरा, सरइडीह और डुमरी कुमकुम में भी जलस्रोत विकसित किये गये हैं. इसके अलावा छतरपुर पूर्वी वन क्षेत्र के डाली और रेहड़ा, छतरपुर पश्चिम के मड़वा, भितिहा, चपरवार, पड़वा, कंणडा, पांडेयपुरा और कुंदरी वन क्षेत्र के जोरकट व सालमदिरी में निर्माण कार्य हुआ है. जंगल में चेकडैम, डोभा और तालाब बनाने से होंगे कई फायदे वन विभाग के अनुसार इन संरचनाओं से पर्यावरणीय सुधार के साथ स्थानीय लोगों के लिए जीविकोपार्जन के अवसर भी बढ़ेंगे. तालाब और चेकडैम में पानी भरा रहने से लोग मछली पालन कर आय बढ़ा सकेंगे. इसके अलावा भूजल स्तर में सुधार होगा और इकोसिस्टम मजबूत होगा. नदी के प्रवाह को भी इससे लाभ मिलेगा. अधिकारियों ने बताया कि खनन के कारण कई क्षेत्रों में वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है और कई जगह ड्राई जोन की स्थिति बन गयी है. ऐसे में जल संरक्षण संरचनाओं से जलस्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी. गर्मी के दिनों में जंगलों में नदी और जलस्रोत सूख जाने से वन्यजीवों को काफी परेशानी होती है. कई बार पानी नहीं मिलने से जानवरों की मौत भी हो जाती है. पिछले साल पांकी में पानी की तलाश में एक कुएं में डूबने से दर्जनों बंदरों की मौत हो गयी थी. वन विभाग ने बताया कि लघु वन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए रीभर बेड बनाकर पौधरोपण भी किया जायेगा, जिससे पानी का प्रवाह बना रहेगा.

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