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मथुरा में कानून बेबस या दबंग बेलगाम..

बरसाना में सुप्रीम कोर्ट के वकील को बंधक बनाए जाने के आरोप से मचा हड़कंप, पुलिस के दावों पर उठे सवाल

मथुरा में अपराधियों और दबंगों पर नकेल कसने के पुलिस के तमाम दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। इस बार मामला बरसाना का है, जहां खुलेआम कथित दबंगई का ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं पेट्रोल पंप संचालक दिवाकर शर्मा को दिनदहाड़े रास्ते में रोककर न सिर्फ मारपीट की गई, बल्कि उन्हें जबरन गाड़ी में डालकर पूर्व चेयरमैन की कोठी पर ले जाया गया। वहां करीब दो घंटे तक बंधक बनाकर रखने, मारपीट करने और हथियार दिखाकर धमकाने के आरोप लगे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मथुरा में दबंगों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि एक सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तक को कथित रूप से अगवा कर कोठी में कैद कर लिया गया?

घटना की जानकारी मिलते ही बरसाना और आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते ग्रामीणों ने पूर्व चेयरमैन की कोठी को चारों तरफ से घेर लिया। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों में गुस्सा साफ दिखाई दिया।

बताया जा रहा है कि जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उसे भी तुरंत अंदर नहीं घुसने दिया गया। करीब 15 मिनट की मशक्कत और तनाव के बाद पुलिस अंदर पहुंच सकी और अधिवक्ता को बाहर निकाला। यह पूरा घटनाक्रम अपने आप में कई सवाल छोड़ गया
क्या अब मथुरा में दबंगों की कोठियां कानून से भी बड़ी हो गई हैं?
क्या पुलिस की सख्ती सिर्फ प्रेस नोट और सोशल मीडिया तक सीमित रह गई है?

ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में अधिवक्ता के फटे कपड़े और मदद की गुहार की चर्चाएं पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

बताया जा रहा है कि पूरा विवाद जमीन और रास्ते को लेकर चल रहा था, लेकिन जिस तरह से दिनदहाड़े कथित अपहरण और बंधक बनाने के आरोप सामने आए हैं, उसने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मथुरा में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि दबंगों के हौसले कम होने के बजाय और बुलंद होते जा रहे हैं। जनता अब पूछ रही है
अगर एक सुप्रीम कोर्ट का वकील ही सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी किस भरोसे जिए?

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