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जिला महिला अस्पताल में एनआरपी दिवस पर 55 स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया जीवन रक्षक प्रशिक्षण

आगरा। नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से रविवार को जिला महिला अस्पताल (लेडी लॉयल) में नियोनटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी) दिवस का आयोजन किया गया। नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनएफ) इंडिया और एनएचएम के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य कर्मियों को जन्म के तुरंत बाद शिशुओं को नया जीवन देने की बारीकियों से अवगत कराया।

शुरुआती मिनट होते हैं निर्णायक

अस्पताल की एसआईसी डॉ. पुष्पलता के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी ने बताया कि जन्म के बाद के शुरुआती कुछ मिनट, जिन्हें गोल्डन मिनट्स कहा जाता है, अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा, "भारत में नवजात मृत्यु का एक बड़ा कारण जन्म के समय शिशु का सांस न ले पाना है। यदि स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित हों और सही तकनीक का उपयोग करें, तो इन मौतों को आसानी से टाला जा सकता है।

सांस दिलाने की वैज्ञानिक तकनीक पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. राजेश मिश्रा ने लेबर रूम में शिशु के जन्म से पूर्व की जाने वाली तैयारियों और सक्रियता पर जोर दिया। वहीं, डॉ. प्रवीन कुमार ने पुनर्जीवन प्रक्रिया में बैग मास्क के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के समय सांस दिलाने की सरल और वैज्ञानिक तकनीकें नवजात के लिए जीवनदान साबित होती हैं।

55 स्वास्थ्य कर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

इस विशेष सत्र में कुल 55 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। उन्हें सिखाया गया कि यदि जन्म के तुरंत बाद शिशु सांस नहीं ले पा रहा है, तो बिना समय गंवाए किस प्रकार उसकी श्वसन प्रक्रिया को सक्रिय करना है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रसव कक्ष में तैनात हर कर्मी आपात स्थिति से निपटने के लिए सक्षम हो।

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