भावुकपल
हरदोई में श्मशान घाट पर एक ऐसा दृश्य देखा जिसने वहां उपस्थित हर व्यक्ति के कलेजे को चीर कर रख दिया। सामने स्व. श्री प्रताप शंकर तिवारी के पुत्र श्री मनोज तिवारी (निवासी: ग्राम चांदा महमदपुर) की चिता सज रही थी। ब्रेन हैमरेज ने एक हँसते-खेलते परिवार की नींव ही उजाड़ दी।
परंतु, इस चिता की अग्नि से कहीं अधिक दहला देने वाली थी पास बैठे 6 वर्षीय मासूम शिवा की पथराई हुई आंखें। वह अपनी नन्हीं नजरों से पिता की मृत देह को ऐसे निहार रहा था, मानो मौन रहकर पूछ रहा हो:
"पापा... अब हमारा कौन? हम कहां रहेंगे? किसके सहारे जिएंगे? माँ तो पहले ही छोड़ गई थी, अब आप भी चले गए? न सर पर छत है, न पैरों तले अपनी जमीन। जिस किराए के कमरे में हम रहते हैं, किराया न होने पर मकान मालिक भी हमें निकाल देगा... अब हम कहां जाएंगे?"
शिवा के साथ उसकी दो बड़ी बहनें (उम्र 13 वर्ष और 11 वर्ष) भी खड़ी हैं, जिनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं और भविष्य अंधकारमय दिख रहा है।
एक साथ माता-पिता का साया उठ जाना किसी भी बच्चे के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।