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एक माँ का सम्मान सिर्फ साल में एक दिन नहीं, बल्कि हर पल होना चाहिए, नितेश सिन्हा ।

कहा जाता है कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने 'माँ' को बनाया। आज साल का वो दिन है, जो उस निस्वार्थ प्रेम और त्याग को समर्पित है जिसे हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते। आज 'मदर्स डे' है। आज की हमारी इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको रूबरू कराएंगे ममता के उस आंचल से, जो हर मुश्किल में हमारे लिए ढाल बना रहता है।"

एक बच्चा जब अपनी पहली चीख के साथ दुनिया में आता है, तो वो माँ ही होती है जो अपनी सारी तकलीफ भूलकर उसे मुस्कुराते हुए गले लगाती है। बचपन की लोरी से लेकर, स्कूल के टिफिन तक और करियर की भागदौड़ से लेकर बुढ़ापे की फिक्र तकमाँ की भूमिका कभी खत्म नहीं होती।

पत्रकार नीतेश सिन्हा का कहना है की आज की माँ केवल घर तक सीमित नहीं है। वह कामकाजी भी है, फाइटर पायलट भी है, और एक सफल उद्यमी भी। लेकिन इन तमाम भूमिकाओं के बीच उसकी ममता कभी कम नहीं होती। वह आज भी घर का वो मजबूत स्तंभ है, जिसके बिना परिवार की नींव अधूरी है। सिर्फ सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाकर नहीं, बल्कि आज अपनी माँ के पास बैठें, उनका हाथ थामें और उन्हें बताएं कि वे आपके लिए कितनी खास हैं। क्योंकि उनके लिए आपका थोड़ा सा समय, किसी भी महंगे तोहफे से बढ़कर है।

दवा जब असर नहीं करती, तो माँ की दुआएं काम आती हैं। वह खुद भूखी सो जाती है, पर बच्चों को भरपेट खिलाती है

आज मदर्स डे पर, हमारा यह न्यूज़ पोर्टल दुनिया की हर उस माँ को सलाम करता है, जिसने अपने बच्चों के सपनों को सच करने के लिए अपने सपनों की आहुति दे दी।

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