खगड़िया जिला के 45 वें स्थापना दिवस न केवल प्रशासनिक उत्सव है, बल्कि, संघर्ष,श्रम, सामाजिक चेतना और विकास की जीवंत गाथा का महापर्व है - शास्त्री
विकासशील पथ पर अग्रसर खगड़िया - शास्त्री
खगड़िया, 10 मई।
गाँव की मिट्टी केवल अन्न नहीं उपजाती, वह संस्कार, संघर्ष और सभ्यता भी जन्म देती है। कुछ इसी भावभूमि को आत्मसात करते हुए जनता दल यूनाइटेड के जिला प्रवक्ता व जिला नागरिक परिषद सदस्य आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने खगड़िया जिला के 45वें स्थापना दिवस पर जिलेवासियों को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि जिला स्थापना दिवस का यह अवसर मात्र एक प्रशासनिक उत्सव नहीं, बल्कि संघर्ष, श्रम, सामाजिक चेतना और विकास की उस जीवंत गाथा का पर्व है, जिसे खगड़िया की धरती दशकों से अपने पसीने और परिश्रम से लिखती आ रही है।
श्री शास्त्री ने कहा कि वर्ष 1981 में जब खगड़िया मुंगेर से अलग होकर स्वतंत्र जिला बना, तब यह क्षेत्र बाढ़, अभाव और पिछड़ेपन की अनेक चुनौतियों से घिरा था। किंतु यहाँ की जनता ने कभी परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेके। किसान की हथेली, मजदूर के पसीने और युवाओं के संकल्प ने इस धरती को निरंतर आगे बढ़ाया। आज वही खगड़िया विकासशील बिहार के मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान अंकित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि खगड़िया केवल भूगोल का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि यह जनजीवन की जीवंत पाठशाला है। यहाँ गंगा, कोसी, बागमती और कमला की धाराएँ केवल जल नहीं बहातीं, बल्कि संघर्ष और सहनशीलता की सभ्यता को भी आगे बढ़ाती हैं। यहाँ की मिट्टी में श्रम का सौंधापन है, यहाँ की हवाओं में अपनत्व की मिठास है और यहाँ के लोगों के हृदय में आत्मसम्मान की वह अग्नि है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बुझती नहीं।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि खगड़िया की धरती त्याग और बलिदान की अमर कहानियों से आलोकित रही है। शहीद प्रभु नारायण और शहीद धन्ना माधव जैसे वीर सपूतों ने मातृभूमि और समाज की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका बलिदान आज भी जिले के युवाओं में राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की चेतना जगाता है।
उन्होंने कहा कि यह भूमि राजनीतिक जागरूकता और जननेतृत्व की भी उर्वर धरती रही है। खगड़िया ने देश को पद्मविभूषण स्वर्गीय रामविलास पासवान जैसे जननायक दिए, जिन्होंने गरीबों, वंचितों और दलितों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद किया। वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह तथा वर्तमान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान जैसे नेताओं ने भी इस धरती की राजनीतिक चेतना को नई दिशा दी। यहाँ की जनता सदैव लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और विकास के पक्ष में खड़ी रही है।
कृषि और उत्पादन के क्षेत्र में खगड़िया की पहचान आज पूरे एशिया में मक्का उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है। यहाँ का किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का सच्चा निर्माता है। केला, पान, दूध-दही, मछली, हरी सब्जियों और डेयरी उत्पादन में भी जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह धरती जितनी उपजाऊ है, उतनी ही कर्मठ भी हैयहाँ मेहनत का हर बीज समृद्धि बनकर अंकुरित होता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ की विभीषिका ने वर्षों तक इस क्षेत्र को चुनौती दी, किंतु खगड़िया ने हर संकट को अवसर में बदलने की शक्ति दिखाई। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, खगड़िया - अलौली तथा खगड़िया -मुंगेर रेलवे मार्ग, सिंचाई, डिजिटल व्यवस्था और आधारभूत संरचनाओं के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन दिखाई दे रहा है। आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज तथा हर घर बिजली, नल का जल, शक्तिपीठ माता कात्यायनी मंदिर का सौन्दर्यकरण और गरीबों के लिए पक्के मकानों जैसी योजनाएँ विकास की नई इबारत लिख रही हैं।
उन्होंने कहा कि आज गाँवों में नई रोशनी पहुँची है, युवाओं के सपनों को पंख मिले हैं, महिलाएँ आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं और किसान आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि को नई दिशा दे रहे हैं। लेकिन विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं होना चाहिए; सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।
श्री शास्त्री ने माता कात्यायनी धाम,भरतखंड के बाबन कोठरी तीरपन द्वार का सौन्द्रीयकरण तथा कसरैया धार को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की उम्मीद के साथ स्थापना दिवस के अवसर पर जिलेवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि यदि हम सब मिलकर भाईचारा, शिक्षा, श्रम और सामाजिक सौहार्द का दीप जलाएँ, तो वह दिन दूर नहीं जब खगड़िया पूरे देश में विकास, कृषि, संस्कृति और सामाजिक एकता का आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
ओजस्वी शैली से प्रेरित भावपूर्ण पंक्तियों के माध्यम से शास्त्री ने कहा कि -
जिस धरा ने आँधियों में भी विजय का गीत गाया है,
उस खगड़िया ने अंधेरों में नया सूरज उगाया है।
मक्का की स्वर्णिम बालियों में श्रम का तेज जलता है,
दूध-दही की गंध में जनमानस का प्रेम पलता है।
कोसी की लहरों सा जिसका साहस अमिट बहता है,
हर संकट की छाती पर जो निर्भीक कदम रखता है।
वीरों की इस पुण्यभूमि का इतिहास अमर, अडिग, महान
मेरा खगड़िया बढ़ रहा, बनकर नवभारत की पहचान।
अंत में उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि खगड़िया निरंतर प्रगति, समृद्धि, सामाजिक सौहार्द और आत्मगौरव की नई ऊँचाइयों को स्पर्श करता रहे।