बहराइच: नगर पालिका ईओ प्रमिता सिंह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 10 बिंदुओं पर खुली धांधली की पोल:
बहराइच। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है, वहीं बहराइच नगर पालिका में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (EO) प्रमिता सिंह पर पंडित राजकुमार वाजपेयी ने मोर्चा खोलते हुए 10 बिंदुओं का एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें करोड़ों के हेरफेर और पद के दुरुपयोग के संगीन आरोप लगाए गए हैं।
भ्रष्टाचार के 'खेल' के मुख्य बिंदु: शिकायती पत्र में विकास कार्यों से लेकर नियुक्तियों तक में बंदरबांट का दावा किया गया है। भ्रष्टाचार के कथित बिंदु इस प्रकार हैं:
कागजों पर पल रहे 'मुन्नाभाई' सफाईकर्मी: आरोप है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से भर्ती 450 सफाईकर्मियों में से 58 कर्मचारी सिर्फ कागजों पर तैनात हैं। इनका वेतन सीधे तौर पर अधिकारियों और बिचौलियों की जेब में जा रहा है।
अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मेहरबानी: नगर पालिका ने शासनादेशों को ताक पर रखकर PWD और जिला पंचायत की सड़कों का निर्माण अपने बजट से करा दिया। नियमों के विरुद्ध इन सड़कों का भुगतान भी आनन-फानन में कर दिया गया।
घटिया निर्माण और री-टेंडरिंग का खेल: शिकायतकर्ता के अनुसार, 6 महीने पहले बनाई गई इंटरलॉकिंग सड़कें धंस चुकी हैं। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि उन्हीं सड़कों पर दोबारा टेंडर जारी कर सरकारी धन की लूट मचाई जा रही है।
1500 की लाइट 18000 में!: स्ट्रीट लाइटों की खरीद में भारी अनियमितता का आरोप है। जो लाइट बाजार में 1500 रुपये की है, उसे 18,000 रुपये में खरीदा दिखाया गया। विडंबना यह है कि इनमें से 75% लाइटें बंद पड़ी हैं।
"सफाई और सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर पालिका का करोड़ों का बजट ठिकाने लगाया गया है। यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका है।"पंडित राजकुमार वाजपेयी (शिकायतकर्ता)____
योगी सरकार की नीति पर सवाल?: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार अधिकारियों को पारदर्शी कार्यप्रणाली की चेतावनी देते रहे हैं। ऐसे में बहराइच नगर पालिका का यह मामला शासन की साख को चुनौती दे रहा है। स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ता ने मांग की है कि:
1. इन सभी 10 बिंदुओं पर उच्चस्तरीय जांच (SIT) बैठाई जाए।
2. दोषी अधिकारियों और फर्मों के खिलाफ रिकवरी और निलंबन की कार्रवाई हो।
3. टेंडर प्रक्रिया और भुगतान के मास्टर रोल की फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
यदि इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह बहराइच नगर पालिका के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या भ्रष्टाचारियों पर बाबा का 'हंटर' चलेगा या जांच फाइलों में दबकर रह जाएगी?