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डिब्रूगढ़-तिनसुकिया में कटाव रोकने के लिए नई सरकार से स्थायी समाधान की मांग

सैखोवाघाट:-डिब्रूगढ़-तिनसुकिया जिला बाढ़ एवं भू-क्षरण (कटाव) प्रतिरोध संघर्ष मंच ने हाल ही में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में विजयी होकर आए विधायकों को बधाई देते हुए नई सरकार से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों से उत्पन्न हो रहे भीषण कटाव पर तत्काल और स्थायी कार्रवाई की मांग की है।
मंच के अध्यक्ष विनोद केड़िया द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में हर वर्ष ब्रह्मपुत्र तथा उसकी उपनदियों के कारण ग्रामीणों की जमीन, घर और कृषि भूमि नदी में समा रही है। नई सरकार से अपेक्षा जताई गई है कि वह इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देगी। उन्होंने ने कहा बाढ़ एवं कटाव विरोधी मंच ने कहा वैज्ञानिक उपायों के बिना समस्या का समाधान संभव नहीं।
विज्ञप्ति में कहा गया कि पूर्ववर्ती सरकार ने माइजान, नगाघुली, बिंधाकाटा, बालिजान, रहमोरिया, दीघलतरंग, बाघजान, कर्दैगुड़ी, लाइना, हाथीघुली, नाओकाटा, फेलाई, केनपास और गोहाईगांव सहित कई क्षेत्रों में कटाव रोकने के प्रयास किए, लेकिन वे वैज्ञानिक दृष्टि से प्रभावी नहीं रहे। संबंधित विभागों पर आरोप लगाया गया कि वे कटाव के मूल कारणों को दूर करने के बजाय प्रभावित स्थानों पर केवल जियोबैग डालकर अस्थायी उपाय कर रहे हैं, जिन्हें नदी की तेज धारा बहाकर ले जा रही है।
मंच ने आरोप लगाया कि विभाग पेड़ की जड़ के बजाय शाखाओं पर पानी डालने जैसी कार्यप्रणाली अपना रहा है। संघर्ष मंच और स्थानीय लोगों ने बार-बार मांग की है कि सैखोवा क्षेत्र में डिबांग नदी द्वारा बनाए गए नए प्रवाह मार्ग को बंद कर नदी को पुराने मार्ग से बहाने की व्यवस्था की जाए, लेकिन विभागीय अभियंताओं ने इस दिशा में गंभीर इच्छा शक्ति नहीं दिखाई। इसी प्रकार सियांग नदी द्वारा धारा बदलने के कारण डिब्रूगढ़ जिले में कटाव की स्थिति और भयावह होती जा रही है। मंच ने नई सरकार से मांग की है कि डिबांग और सियांग नदियों की धारा को पुनः पुराने मार्ग की ओर मोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
विज्ञप्ति में चेतावनी दी गई है कि यदि मूल कारणों का समाधान नहीं किया गया, तो डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में जारी कटाव की समस्या को रोक पाना संभव नहीं होगा।
संघर्ष मंच ने नवगठित सरकार के मुख्यमंत्री से स्वयं हस्तक्षेप कर पहली ही बैठक में दोनों जिलों में कटाव के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक जांच कर स्थायी समाधान की दिशा में निर्णय लेने की अपील की है।

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