बलिया में महिला डाककर्मी से छेड़खानी और मारपीट का आरोप, FIR न होने पर योगी आदित्यनाथ से लगाई न्याय की गुहार।
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रेवती क्षेत्र से महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है। रेवती डाकघर में तैनात एक महिला कर्मचारी ने अपने ही सहकर्मी पर लंबे समय से छेड़खानी, मानसिक प्रताड़ना और मारपीट का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई की और न ही पुलिस ने उसकी FIR दर्ज की।
बताया जा रहा है कि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक मारपीट का वीडियो वायरल हुआ, जिसे रेवती डाकघर का बताया जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला और गरमा गया। पहले पक्ष की ओर से दी गई तहरीर पर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
इसी बीच, मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता महिला ने मीडिया के सामने आकर अपने ही सहकर्मी अभिषेक सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। पीड़िता के अनुसार, अक्टूबर 2024 से ही आरोपी उसे परेशान कर रहा थागलत तरीके से छूना, अश्लील टिप्पणियां करना और विरोध करने पर जान से मारने व नौकरी से निकलवाने की धमकी देना उसकी आदत बन चुकी थी।
महिला का आरोप है कि उसने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार उसे यही कहा गया कि पुलिस में जाने से विभाग की बदनामी होगी। जब उसने अपने परिवार को इस बारे में बताया, तो वे डाकघर पहुंचे, जहां दोनों पक्षों में विवाद के बाद मारपीट हो गई, जिसका वीडियो वायरल हो गया।
पीड़िता ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि जब वह शिकायत लेकर थाने पहुंची तो उसका मोबाइल लेकर डेटा डिलीट कर दिया गया और देर रात तक उसे थाने में बैठाए रखा गया। इतना ही नहीं, अगले दिन उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसके ही परिजनों पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिसमें उसके एक भाई को जेल भेज दिया गया।
पीड़िता ने यह भी बताया कि उसने अपनी सुरक्षा को देखते हुए पहले ट्रांसफर करवा लिया था, लेकिन बाद में उसे दोबारा रेवती भेज दिया गया। उसने आरोप लगाया कि ट्रांसफर के लिए उससे पैसे भी मांगे गए थे।
5 मई को हुई ताजा घटना का जिक्र करते हुए पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने फिर से छेड़खानी की और विरोध करने पर उस पर चप्पल फेंककर हमला किया। इसके बाद मौके पर पहुंचे परिवारवालों के साथ भी मारपीट और गाली-गलौज की गई।
अब पीड़िता ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। उसने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद उसे विभाग द्वारा निलंबित भी कर दिया गया है और उसका पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है।
मामले को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि पीड़िता को कब तक न्याय मिल पाता है।