logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

समुद्र की लहरों पर 'हंता' का साया क्या हम एक और महामारी की दहलीज पर हैं?

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

अभी दुनिया पिछले कुछ वर्षों के स्वास्थ्य संकटों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अटलांटिक महासागर की लहरों के बीच से एक डरावनी खबर आई है।
MV होंडियस नामक जहाज पर हंतावायरस के तांडव ने न केवल 3 जिंदगियां ली हैं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणालियों की चूलें हिला दी हैं।
केप वर्डे के पास फंसे इस जहाज की कहानी अब महज एक समुद्री हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है।

चूहे, जहाज और जानलेवा वायरस,
इतिहास गवाह है कि समुद्री जहाजों ने ही 'प्लेग' जैसी महामारियों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुँचाया था।
2026 में हंतावायरस का एक आधुनिक क्रूज या रिसर्च वेसल पर मिलना हमारी स्वच्छता और 'बायो-सिक्योरिटी' (Bio-security) के दावों पर तमाचा है।
सवाल यह है कि एक बंद वातावरण में यह वायरस इतनी तेजी से कैसे फैला?
क्या जहाज पर चूहों का साम्राज्य था, या वायरस ने अपना स्वरूप बदलकर इंसानों से इंसानों में फैलना शुरू कर दिया है?

खतरे की घंटी:
"साइलेंट किलर"
हंतावायरस कोई नया नाम नहीं है, लेकिन इसकी मृत्यु दर (Fatality Rate) इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
कुछ मामलों में यह दर 38% तक हो सकती है। जहाज से मरीजों को निकालकर नीदरलैंड भेजना एक जरूरी कदम है, लेकिन क्या हम उन देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं जहाँ ये मरीज उतर रहे हैं?

व्यवस्था पर सवाल,
निगरानी में चूक: अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के बावजूद जहाज पर रोडेंट्स (Rodents) का होना बंदरगाहों पर होने वाली 'हाइजीन ऑडिट' की पोल खोलता है।

प्रोटोकॉल का अभाव:
क्या हमारे पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों के लिए कोई ठोस 'क्वारंटाइन' नीति है?

सूचना की पारदर्शिता:
क्या इस संक्रमण की खबर वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों (WHO) को समय पर दी गई?

निष्कर्ष
अटलांटिक में फंसा वह जहाज आज पूरी मानवता की स्थिति का प्रतीक हैचारों ओर संसाधनों का समंदर है, लेकिन भीतर एक अदृश्य दुश्मन जान ले रहा है।
यदि समय रहते MV होंडियस की घटना से सबक नहीं लिया गया और समुद्री मार्गों पर स्वास्थ्य प्रोटोकॉल सख्त नहीं किए गए, तो याद रखिए, वायरस को सरहदें पार करने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती।

वक्त आ गया है कि हम 'पैनिक' न करें, लेकिन 'प्रिपेयर' जरूर रहें। समुद्र की इन लहरों ने जो चेतावनी दी है, उसे अनसुना करना आत्मघाती होगा।

0
344 views

Comment