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कन्या स्कूल के प्रिंसिपल भुपिंदर सिंह के खिलाफ आरोपों के 253 पन्नों के सबूत पेश: प्रिं. सुरेश अरोड़ा

फरीदकोट, 08.05.26 (नायब राज)

पिछले 7 महीनों से पूर्व शिक्षा अधिकारी और समाजसेवी प्रिं. सुरेश अरोड़ा जिला प्रशासन, शिक्षा अधिकारियों और पंजाब सरकार के पास सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बस स्टैंड के नजदीक, फरीदकोट के स्वयंभू प्रिंसिपल भुपिंदर सिंह द्वारा स्कूल में की गई अनेक वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ जनहित में शिकायतें कर रहे थे। लेकिन शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत के कारण भुपिंदर सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया गया कि भुपिंदर सिंह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान फरीदकोट के स्थायी प्रिंसिपल हैं और सरकारी स्कूल की डीडी पावर जबरन इस्तेमाल कर रहे हैं।

बताया गया कि इस स्कूल के अतिरिक्त चार्ज के लिए उनके पास कोई आदेश नहीं हैं और वे 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारी उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि 30 जून तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो सके, और इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण भी बताया जा रहा है।

पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) फरीदकोट श्रीमती नीलम रानी ने भी कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि वे 28 फरवरी 2026 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। शिकायतों के संबंध में नीलम रानी ने 19/12/2026 के पत्र के माध्यम से 24/12/2026 को अपने कार्यालय में जांच रखी थी, लेकिन जांच से एक दिन पहले ही उसे स्थगित कर दिया गया और आज तक नई तारीख नहीं दी गई।

बार-बार लिखने के बाद मौजूदा जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती अंजना कौशल ने 20 मार्च को फरीदकोट जिले के तीन प्रिंसिपलों का पैनल बनाकर प्रिंसिपल भुपिंदर सिंह के खिलाफ शिकायतों की जांच के आदेश जारी किए और एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। इस पैनल में श्री पन्ना लाल (प्रिंसिपल, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल लड़के, कोटकपूरा), श्रीमती कुलविंदर कौर (प्रिंसिपल, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल खारा) और श्री गोपाल कृष्ण (प्रिंसिपल, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पक्की कलां) शामिल हैं।

शिकायतकर्ता सुरेश अरोड़ा ने बताया कि सरकार के तबादला आदेशों के अनुसार भुपिंदर सिंह का तबादला सरकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान फरीदकोट में किया गया था, जिसमें सरकारी कन्या स्कूल के अतिरिक्त चार्ज का कोई उल्लेख नहीं था। स्कूल प्रमुखों को अतिरिक्त चार्ज देने के आदेश जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए जाते हैं, जबकि भुपिंदर सिंह को ऐसे कोई आदेश जारी नहीं किए गए।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि भुपिंदर सिंह के पास सरकारी कन्या स्कूल फरीदकोट की डीडी पावर के कोई वैध आदेश नहीं हैं और इसके बावजूद वे अनेक वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं कर रहे हैं। आरोप है कि गरीब परिवारों की छात्राओं से बिना किसी अनुमति के चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर प्रति छात्रा 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि शिक्षकों से वेतन निकलवाने के बदले 200-200 रुपये लेने के आरोप भी लगाए गए हैं।

आरोपों के अनुसार स्कूल में छात्राओं के लिए बनाई गई एसी शूटिंग रेंज का एसी उतारकर अपने कार्यालय में लगवा लिया गया। विरोध न हो, इसके लिए क्लर्क और शिक्षकों के स्टाफ रूम में भी एसी लगवा दिए गए, जिनका बिजली बिल सरकारी खजाने से भरा जाता है, जबकि छात्राओं को ऐसी सुविधा नहीं दी गई।

इसके अलावा स्कूल परिसर के कई हरे-भरे पेड़ कटवाने, स्वतंत्रता सेनानी की याद में लगा स्मारक पत्थर हटाने, राष्ट्रपति के साथ छात्राओं की तस्वीर हटाने, मिड-डे मील का राशन गैरकानूनी तरीके से बाहर ले जाने, कैंटीन का ठेका मनमर्जी से बदलने, कोरोना काल में क्लर्क के खिलाफ झूठी शिकायत कर उसकी सेवाएं समाप्त करवाने और शैक्षणिक दौरों में अनियमितताएं करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

जांच अधिकारियों द्वारा 6 मई को शिकायतकर्ताओं को सरकारी कन्या स्कूल फरीदकोट में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया। सुरेश अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने शिकायतों से संबंधित 253 पन्नों के सबूत जांच अधिकारियों को सौंपे, जिनमें कई तस्वीरें भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि अगली तारीख पर और भी आवश्यक सबूत पेश किए जाएंगे। अगली सुनवाई 12 मई को रखी गई है।

फोटो: सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल फरीदकोट के प्रिंसिपल भुपिंदर सिंह के खिलाफ शिकायतों से संबंधित 253 पन्नों के सबूत शिकायतकर्ता सुरेश अरोड़ा द्वारा प्रिंसिपल गोपाल कृष्ण को सौंपते हुए, साथ में प्रिं. पन्ना लाल और प्रिं. कु

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