अब नही तो कब ? हम नही तो कौ ?
उत्तराखंड की देवतुल्य जनता से भावपूर्ण आह्वान
देवभूमि उत्तराखंड के स्वाभिमानी नागरिकों, अब समय केवल फेसबुक पर देखने और लाइक कमैंट्स करने का नहीं, बल्कि जागने और जगाने का है। हमारी स्थायी राजधानी गैरसैंण केवल एक स्थान नहीं, बल्कि पहाड़ की दशा और दिशा सुधारने का एक मात्र विकल्प और राज्य आंदोलनकारियों के सपनों और जनभावनाओं का प्रतीक है।
आज आवश्यकता है कि हम अपने निजी मतभेद, राजनीतिक सोच और व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एकजुट हों। सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और प्रभावशाली तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें। यह लड़ाई किसी दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के सम्मान, संतुलित विकास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुनिश्चित करने की है।
यदि आज हम मौन रहे, तो इतिहास हमें क्षमा नहीं करेगा। पहाड़ का हक, पहाड़ की पहचान और राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष का सम्मान तभी होगा, जब जनता स्वयं आगे आएगी।
आइए, देहरादून एकता विहार धरना स्थल पर पहुंच जनशक्ति का परिचय दें और गैरसैंण के समर्थन में जो आंदोलनकारी गत 8 मार्च से क्रमिक अनसन के द्वारा आपकी और अपनी एक ही मांग और अधिकार स्थाई राजधानी गैरसैण के लिए सड़कों पर उतरकर तथाकथित धरना स्थल पर यह संदेश देने की कोशिस कर रहे हैं कि कि उत्तराखंड की जनता अब जाग चुकी है उनको सम्पूर्ण सहयोग और समर्थन देकर अपने पहाड़ी होने के धर्म का पालन करें
अब नहीं तो कब? हम नहीं तो कौन?
जय भारत,जय उत्तराखंड, जय पहाड़,जय गैरसैंण!