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श्री विनोद चंद्र भट्ट का ऐतिहासिक संघर्ष; पदयात्राओं और RTI के माध्यम से उत्तराखंड में फूँका जन-जागरण का शंखनाद

हल्द्वानी (नैनीताल):
उत्तराखंड की पावन धरा से एक ऐसी शख्सियत उभर कर सामने आई है, जिसने अपना संपूर्ण जीवन 'गौ सेवा, जन सेवा और राष्ट्र सेवा' के लिए समर्पित कर दिया है। 'उन्नति स्वयं सहायता समिति' के सचिव श्री विनोद चंद्र भट्ट आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके जीवन का मुख्य संकल्प गौ माता को 'राष्ट्र माता' का संवैधानिक दर्जा दिलाना है, जिसके लिए वे कानूनी और सामाजिक धरातल पर निरंतर संघर्षरत हैं।
विनोद चंद्र भट्ट की पहचान उनके कठिन संघर्षों और ऐतिहासिक पदयात्राओं से है। उन्होंने जन-जागरूकता के लिए रामनगर से विशाल जन-आंदोलन की शुरुआत की और हल्द्वानी से अल्मोड़ा तक की 170 किमी की पैदल यात्रा पूरी कर शासन-प्रशासन को जगाने का काम किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने लालकुआं से रामनगर और हरिद्वार से देहरादून तक की अत्यंत कठिन दंडवत यात्राएं भी की हैं।
एक प्रखर RTI एक्टिविस्ट के रूप में वे प्रशासनिक पारदर्शिता और चारागाहों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। "सूचना ही शक्ति है" के मूल मंत्र के साथ वे 'उत्तराखंड गौ हुंकार' डिजिटल पोर्टल के माध्यम से समाज के अंतिम छोर की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड हो या लंबी पैदल यात्राएं, उनका धैर्य और सनातन मूल्यों के प्रति समर्पण उन्हें एक सच्चे जन-नायक के रूप में स्थापित करता है।

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