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विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग में 'संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर' विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित*

विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग में 'संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर' विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित*

कंप्यूटर के माध्यम से संस्कृत के ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण से हमारी प्राचीन ज्ञान-परंपरा होगी सुरक्षित एवं विस्तृत- डॉ विकास*

ऑनलाइन सेमिनार में देश-विदेश के 60 से अधिक शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की हुई सहभागिता

संस्कृत-ज्ञान की मूल आधारशिला गुरु-शिष्य परंपरा, पर कंप्यूटर इसके देश-विदेश में प्रचार-प्रसार का बड़ा माध्यम- डॉ कृष्णकांत

संस्कृत की वैज्ञानिकता, तार्किकता तथा व्याकरणिक शुद्धता कंप्यूटर के लिए महत्वपूर्ण- डॉ चौरसिया

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग द्वारा "संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर" विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा ने किया। जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू-कश्मीर में तुलनात्मक धर्म एवं सभ्यता केन्द्र के एसोसिएट प्रो डॉ विकास सिंह- मुख्य वक्ता, संस्कृत-प्राध्यापक डॉ आर एन चौरसिया- विषय प्रवेशक, संयोजिका डॉ ममता स्नेही- स्वागत कर्ता तथा डॉ मोना शर्मा ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में थाईलैंड से भंते आनिंदा, दिल्ली विश्वविद्यालय से ओंकारनाथ, जम्मू-कश्मीर से डॉ संतोष कुमार, भागलपुर विश्वविद्यालय से डॉ रामायण सिंह, जेएनयू, दिल्ली से प्रेरणा नारायण, सीतामढ़ी से आशीष रंजन, पश्चिम बंगाल से नजमा हसन, बेगूसराय से डॉ विजयमल बैठा एवं प्रो दीपक कुमार विश्वकर्मा, डॉ प्रियंका राय, डॉ ज्योति प्रभा, डॉ संजीव कुमार साह, डॉ बाल कृष्ण कुमार सिंह, जिग्नेश कुमार, सहित 60 से अधिक व्यक्तियों ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता डॉ विकास सिंह सिंह ने कहा कि संस्कृत की संरचना वैज्ञानिक है। पाणिनि के अष्टाध्यायी में करीब 4000 सूत्र हैं जो कंप्यूटर के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। संस्कृत भाषा की विशेषताएं कंप्यूटर साइंस के अनुरूप हैं। यदि कंप्यूटर साइंस के माध्यम से संस्कृत के ज्ञान-विज्ञान का संरक्षण किया जाए तो हमारी प्राचीन ज्ञान-परंपरा संरक्षित एवं विस्तृत होगी। आज भारत सहित पूरे विश्व में संस्कृत और कंप्यूटर पर व्यापक विमर्श चल रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 एवं पीजी के सिलेबस की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें भी संस्कृत और कंप्यूटर के महत्त्वों को रेखांकित किया गया है।
विषय प्रवेश करते हुए डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि संस्कृत भाषा और कंप्यूटर में गहरा संबंध है। कंप्यूटर साइंस संस्कृत-अध्ययन को डिजिटल रूप प्रदान कर रहा है। संस्कृत की व्याकरणिक संरचना इतनी स्पष्ट और तार्किक है कि यह कंप्यूटर के लिए अत्यंत उपयुक्त भाषा सिद्ध हो रही है। कहा कि संस्कृत विश्व की अत्यंत प्राचीन, वैज्ञानिक, समृद्ध एवं व्यवस्थित भाषा है, जिसके व्याकरणिक नियम संक्षिप्त सूत्रों में निबंद्ध हैं जो कंप्यूटर एल्गोरिद्म से मिलती-जुलती है। संस्कृत साहित्य का डिजिटल रूप भविष्य के लिए ज्ञान-संरक्षण का माध्यम बन रहा है। यह केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान एवं कंप्यूटर युग में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इसकी वैज्ञानिकता, तार्किकता तथा व्याकरणिक शुद्धता कंप्यूटर के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ कृष्णकांत झा ने कहा कि संस्कृत का ज्ञान सिर्फ कंप्यूटर के माध्यम से सहजता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है, तथापि यह संस्कृत को देश-विदेश में प्रचार-प्रसार का बड़ा माध्यम जरूर हो सकता है। आज भी संस्कृत-ज्ञान की मूल आधारशिला गुरु-शिष्य परंपरा ही है। संयोजिका डॉ ममता स्नेही ने स्वागत एवं संचालन किया, जबकि धन्यवाद डॉ मोना शर्मा ने किया। समापन राष्ट्रगान स

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