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एफआईआर, विभागीय रोक और मीडिया खुलासों के बाद भी नहीं रुकी मनमानी, संवेदनशील जल संरचना के पास फिर बारूद बिछाने की तैयारी

डिंडोरी -- आदिवासी अंचल डिंडोरी में विकास कार्यों की आड़ में नियमों और सुरक्षा मानकों को किस कदर ताक पर रखा जा रहा है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण इन दिनों शहपुरा विकासखंड का बिलगढ़ा बांध क्षेत्र बन चुका है। हैरत की बात यह है कि संवेदनशील जलीय संरचना के बेहद करीब इंटेकवेल निर्माण के नाम पर विस्फोटक सामग्री का उपयोग लगातार जारी है, जबकि ऐसे ही एक मामले में पहले एफआईआर दर्ज हो चुकी है। बिलगढ़ा बांध के नजदीक स्भावित खतरे को देखते हुए विभागीय अधिकारियों द्वारा काम रोकने के निर्देश दिए जा चुके हैं और मामला जिला एवं पुलिस प्रशासन के संज्ञान में भी है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी का बेखौफ रवैया कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, लगभग दो दिन पूर्व इस पूरे मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करेगा और संवेदनशील बांध क्षेत्र में चल रहे विस्फोटक कार्यों पर रोक लगेगी। लेकिन हुआ ठीक इसके उलट। खबर प्रकाशित होने के बाद भी कंपनी की गतिविधियां लगातार जारी रहीं। खबर लिखे जाने तक मौके पर विस्फोट कर बनाए गए विशाल गड्ढे से तीन मोटर पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा था, वहीं दूसरी ओर पुनः बारूद बिछाने के लिए ड्रिलिंग कार्य जारी था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही पानी का स्तर कम होगा, एक बार फिर जिलेटिन लगाकर धमाके किए जाएंगे।

जलीय संरचना के बेहद करीब चल रहा खतरनाक काम -- बताया जा रहा है कि निर्माण स्थल बिलगढ़ा बांध की जलीय संरचना से महज लगभग 50 फीट की दूरी पर स्थित है, जबकि बांध के गेट भी करीब 100 मीटर के दायरे में हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में भारी विस्फोटक सामग्री का उपयोग किसी बड़े खतरे से कम नहीं माना जा रहा। बावजूद इसके, निर्माण एजेंसी नियम-कायदों को खुली चुनौती देती नजर आ रही है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बीते कई दिनों से पूरा क्षेत्र बारूद के धमाकों से दहल रहा है। आरोप है कि एक बार में सैकड़ों जिलेटिन छड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है और पुलिस को बिना सूचना दिए विस्फोट किए जा रहे हैं। मौके पर 40 से 50 मीटर तक खुदा विशाल गड्ढा इस बात की तस्दीक करता है कि कार्य किस स्तर पर किया गया है।

एफआईआर के बाद भी नहीं टूटा दबदबा --
गौरतलब है कि इससे पहले भी बिलगढ़ा जलाशय क्षेत्र में बिना अनुमति विस्फोटक उपयोग करने के मामले में शहपुरा पुलिस द्वारा कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। यह पूरा कार्य जल निगम की वृहद परियोजना के अंतर्गत मेसर्स जी ए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। लेकिन कार्रवाई के बाद भी कंपनी के तौर-तरीकों में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा।

विभागीय निर्देश भी बेअसर --
इस मामले को लेकर हमारे प्रतिनिधि द्वारा अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन विभाग शहपुरा को भी जानकारी दी गई थी। इससे पहले कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग ने भी कार्य रोकने और संबंधित एजेंसी से जवाब तलब करने की बात कही थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण कार्य लगातार जारी रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किसके संरक्षण में संवेदनशील बांध क्षेत्र में नियमों को धता बताते हुए विस्फोटक उपयोग किया जा रहा है ?

बड़े नेता के नाम की चर्चा से और गहराया मामला -- मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने मीडिया के सामने यह दावा कर दिया कि विस्फोटक उपयोग भाजपा के एक प्रभावशाली आदमकद जनप्रतिनिधि के कहने पर किया जा रहा है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब यह चर्चा तेज है कि क्या कंपनी केवल दबाव बनाने के लिए बड़े नामों का सहारा ले रही है या वास्तव में उसे किसी राजनीतिक संरक्षण का कवच प्राप्त है ?

ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन पर उठ रहे सवाल -- बारूद के लगातार धमाकों से आसपास के ग्रामीण भय और दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के संज्ञान में है, तब आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही तंत्र जागेगा ?

लिहाजा देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में केवल पत्राचार तक सीमित रहता है या फिर वास्तव में संवेदनशील जल संरचना की सुरक्षा और आमजन की जान-माल की रक्षा के लिए कोई कठोर कदम उठाए जाते हैं

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