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महाराणा प्रताप जयंती पर गूंजा वीरता और स्वाभिमान का संदेशश्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई जयंती

मीरजापुर (पड़री/पहाड़ी ) :- श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा पड़री थाना क्षेत्र अंतर्गत करणी सेना के उपाध्यक्ष प्रिंस सिंह के नेतृत्व में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती बड़े ही धूमधाम, उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। पूरे आयोजन के दौरान राजपूताना शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भावना से वातावरण ओत-प्रोत रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अभयराज सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सचिन जंग बहादुर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं एवं समाज के गणमान्य लोगों की सहभागिता देखने को मिली।

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता के अमर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कभी भी अन्याय और पराधीनता के सामने सिर नहीं झुकाया। उनका सम्पूर्ण जीवन त्याग, संघर्ष और मातृभूमि के सम्मान के लिए समर्पित रहा। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्रहित में कार्य करे।

इस दौरान दिलीप सिंह गहरवार ने महाराणा प्रताप को समर्पित भावपूर्ण शायरी सुनाकर उपस्थित लोगों में जोश भर दिया

> माटी मेवाड़ की आज भी वीरों की कहानी कहती है,
प्रताप की तलवार आज भी स्वाभिमान की गाथा कहती है।
जिसने घास की रोटी खाकर भी शीश नहीं झुकाया था,
भारत माँ का वो सच्चा लाल महाराणा प्रताप कहलाया था।

> झुककर जीना जिनको आया ही नहीं,
रणभूमि छोड़ना जिन्होंने कभी पाया ही नहीं।
स्वाभिमान की खातिर जिसने सब कुछ वार दिया,
इतिहास ने उसी वीर को महाराणा प्रताप नाम दिया।

मुख्य अतिथि अभयराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के महानतम योद्धाओं में से एक हैं। वीरता, बलिदान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक महाराणा प्रताप ने मुगल साम्राज्य के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और मेवाड़ की आन-बान-शान की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे। उनका जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम के आयोजक एवं संयोजक प्रिंस सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप की सबसे बड़ी ताकत उनकी अटल इच्छाशक्ति और स्वतंत्रता के प्रति असीम प्रेम था। उन्होंने न केवल मुगलों की शक्ति का सामना किया, बल्कि उन राजपूत शासकों को भी जवाब दिया जो समझौते की राह पर चल पड़े थे। महाराणा प्रताप का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि सच्चा योद्धा वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे।

इस अवसर पर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अनेक वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा महाराणा प्रताप के जीवन संघर्ष, त्याग और वीरता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राकेश सिंह राणा, मोहित सिंह, कुश कुमार सिंह, युवराज सिंह, शिवम सिंह, इंस्पेक्टर सिंह, अवनीश सिंह, पंचम सिंह, धनंजय सिंह, पंचराज सिंह, जंग बहादुर सिंह, मनीष सिंह एवं राजेश सिंह बैधा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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