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मरहूम इलियास आजमी जी की चौथी वर्षगांठ पर इस सम्मेलन में हम लोगों के सामने उनके नजरिए को हम सबको पूरा करना.

मरहूम इलियास आजमी जी की चौथी वर्षगांठ पर इस सम्मेलन में हम लोगों के सामने उनके नजरिए को हम सबको पूरा करना है क्योंकि देश और मानव के लिए तथा सबके लिए महत्वपूर्ण है हमारा बहुत पहले से संबंध उनका रहा है जब वह बसपा से सांसद हुए थे मैं बामसेफ में कार्य करता था क्योंकि मान्यवर कांशीराम जी से सीधे संबंध थे इसलिए बहुत वह नजदीक रहा करते थे और इसके बाद बसपा से हटाने के बाद हमसे कही नजदीकियां रही है पार्टी के संबंध में हमेशा बात करते थे कोई ऐसी पार्टी बनाई जाए जो बसपा की कॉन्सेप्ट से मिले और हकीकत में काम हो जो देश में वंचित है या वंचित किए गए हैं उनको देश में मुख्य धारा में स्थापित किया जाए ।
देश में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए बने प्रथम नेतृत्व के संविधान और प्रस्तावना के अनुरूप बने किसी विचारधारा के लोगों के उंगली ना उठाएं क्यों की देश सबका है हम सब लोगों ने मिलकर जीता है सब की भागीदारी सुनिश्चित बने संविधान के तीन स्तंभ विधायिका कार्यपालिका न्यायपालिका और मीडिया सेना सुरक्षा कल कारखाने और समस्त संस्थाओं में प्रतिनिधित्व भागीदारी करने की स्थिति प्रदान करना सुनिश्चित हो तभी आजाद भारत के नेतृत्व का संकल्प साकार होगा और इस देश में तमाम महापुरुषों जो संघर्ष किया है चाहे आजादी हो चाहे मानवता के लिए हो चाहे गैर बराबरी को खत्म करने के लिए सभी उसमें समाहित रहेंगे या देश मजबूत और आदर्श भारत निर्मित के कहने मात्र से नहीं इसको करना होगा । साथियों मिशन का सिद्धांत जिसे भागीदारी आंदोलन के रूप में चलाया जा रहा है देश में भागीदारी सिद्धांत हर व्यक्ति की कार्य सक्षमता के अनुरूप हर स्तर पर भागीदारी सुरक्षित करवानी है जिसके लिए एक बड़ा स्ट्रक्चर तैयार किया गया है तमाम शामिल लोग आंदोलन के गति सिद्धांत को देखकर अपने-अपने को श्रेष्ठ बनाने के लिए आगे बढ़कर पांच पार्टियों का गठन किया है दूसरा वर्तमान में जो नेतृत्व है वह हर व्यक्ति भागीदारी की बात कर रहा है यहां तक की सत्ता में बैठे लोग भागीदारी का सपना दिखाकर लोगों को आकर्षित कर रहे दूसरी तरफ विपक्ष के नेता भागीदारी से बहुत दूर रहे हैं जिसके कारण से वह भागीदारी का स्वरूप लोगों तक ले जाते हैं और वह फेल हो जाता है क्योंकि सत्ता में रहे कभी उस पर काम नहीं किया जैसे अभी कई प्रदेशों में सरकार में है। भागीदारी केवल वोट के लिए कर रहे हैं ना कि उसे स्थापित करने के लिए, क्योंकि जिन प्रदेशों में सरकार हैं तो पूर्व में जो जनगणना हुई थी उसके अनुसार देश में चल रही सरकारो में तथा कार्य रोजगारो में भागीदारी प्रतिनिधित्व क्यों नहीं लागू कर रहे हैं यह सवाल है जबकि उसके कांसेप्ट को अलग-अलग, नेता अपने-अपने ढंग से भागीदारी देता है कोई विद्युत फ्री करता है तो कोई किसान निधि के रूप में वोट खरीदना है तो कोई रु 5000 रु 10000 महिलाओं को बेरोजगारों को देने की बात करते हैं इस तरह से अलग-अलग रूप में लोगों को अलग करके और उनके वोट लेकर अपनी सत्ता स्थापित करते हैं ।
मान्यवर कांशी राम जी के बामसेफ आंदोलन प्लान को तथाकथित उत्तराधिकारी के द्वारा खत्म किया जाना । और मानवता में हो रहे भेदभाव को देखते हुए राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन के रूप में इसे सामने लाया गया जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया लेकिन अपने-अपने स्वार्थ में अपने-अपने हितों में इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जिसके कारण से जो समाज में कार्य होना चाहिए इसका लाभ समाज को मिलना चाहिए देश को मिलना चाहिए यह पेटेंट तथा अनिवार्य बनना चाहिए लेकिन अभी तक केवल मिसयूज हो रहा है । Late इलियास आदमी की वह सोच सिद्धांत को जो तमाम महापुरुषों और प्रथम नेतृत्व के सिद्धांत संकल्प की सोच से संबंधित है उसे अगर सरकार करना चाहते हो तो एक साथ खड़े हो जाओ अपने राइट एवं हिस्सेदारी के लिए, आप आव्यवस्थित लोगों को जवाब मत दो आप अपना काम में आगे बढ़ो इस देश में अब विकृत व्यवस्था के लोग नाश्ते नाबूत हो जाएगे और यह देश फिर से विश्व गुरु आदर्श भारत का रूप ले लेगा इस आदर्श भारत से जाना जाएगा और या भागीदारी आंदोलन पूरे विश्व में अपना स्थान सुनिश्चित कर ले लेगा।

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