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फरीदाबाद****पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने मजदूरों के हक में उठाई आवाज; न्यूनतम मजदूरी में मामूली वृद्धि को बताया ऊंट के मुंह में जीरा।

फरीदाबाद**

एनआईटी 86 से पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में की गई वृद्धि को नाकाफी और मजदूरों के साथ मजाक करार दिया है। इसी मांग को लेकर पूर्व विधायक नीरज शर्मा आज उप श्रम आयुक्त कार्यालय, फरीदाबाद पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख मजदूरों के प्रति कभी भी सकारात्मक नहीं रहा है।

एनआईटी 86 फरीदाबाद के पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में न्यूनतम मजदूरी में की गई वृद्धि को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि सरकार का मजदूरों के प्रति रवैया हमेशा से नकारात्मक रहा है और यह मामूली बढ़ोतरी पिछले 10 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद की गई है, जबकि कायदे से इसे हर 5 वर्ष में संशोधित किया जाना चाहिए था। श्री शर्मा ने सदन के भीतर भी बार-बार न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग उठाई थी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उन्होंने बताया कि जगह-जगह मजदूरों में इस वृद्धि को लेकर भारी आक्रोश है और कई मालिक न्यूनतम वेतन भी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इसे प्रदेश में कड़ाई से लागू कराया जाए। विशेष रूप से उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली-NCR का हिस्सा होने के कारण फरीदाबाद के मजदूरों को प्रदूषण के दौरान लागू होने वाले ग्रेप (GRAP) की पाबंदियों का खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। जब फरीदाबाद दिल्ली-NCR की सभी शर्तों और पाबंदियों को झेलता है, तो यहाँ की मजदूरी भी दिल्ली के समान क्यों नहीं होनी चाहिए?
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अकुशल श्रमिकों के लिए 15,220.71 प्रति माह की दरें तय की हैं। पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने तर्क दिया कि पिछले 4-5 वर्षों में पेट्रोल, दूध, खाद्यान्न और कपड़ों जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम दोगुने से भी अधिक बढ़ चुके हैं, जिसके सामने यह वृद्धि अत्यंत कम है। विशेष रूप से फरीदाबाद और गुड़गांव जैसे औद्योगिक शहरों में रहने वाले लाखों प्रवासी मजदूर, जिन्हें भारी मकान किराया देना पड़ता है, इस वेतन में अपना गुजारा करने में असमर्थ हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि महंगाई के आंकड़ों के आधार पर वेतन में स्वतः वृद्धि (Automatic Revision) का तंत्र लागू किया जाए ताकि मजदूरों को अपने हक के लिए दशकों तक इंतजार न करना पड़े।

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