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सहजन वन में घटिया निर्माण, गेट टूटा, गांव में जलभराव, ग्रामीण बेहाल

शाहजहांपुर की ब्लाक भावलखेडा के गांव तुर्की खेड़ा में विकसित किया गया सहजन वन, तीसरी बार टूटा गेट, मरम्मत पर भारी खर्च , स्थानीय जिम्मेदारों के लिए कमाई का जरिया बना प्रोजेक्ट

जनपद के विकासखंड भालखेड़ा क्षेत्र स्थित तुर्की खेड़ा सहजन वन में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से विकसित किए गए इस सहजन वन को क्षेत्र का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब यहां घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग और अव्यवस्थित विकास कार्यों के आरोप लगने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद सहजन वन में कराए गए निर्माण कार्य टिकाऊ साबित नहीं हो रहे हैं। हाल ही में सहजन वन का मुख्य गेट और उस पर लगा बोर्ड मामूली हवा में टूटकर गिर गया। स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पहले भी कई बार हल्की आंधी और तेज हवा में गेट क्षतिग्रस्त हो चुका है, लेकिन हर बार केवल मरम्मत कर मामले को दबा दिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण लोहे का ढांचा और गेट बार-बार टूट रहा है। पिछले दो दिनों से टूटा हुआ बोर्ड वहीं पड़ा है, लेकिन अब तक उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालांकि सहजन वन में लगाए गए सहजन के पौधे अच्छी स्थिति में दिखाई दे रहे हैं और हरियाली भी विकसित हो रही है, लेकिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से कराए जाते तो यह परियोजना क्षेत्र के लिए मिसाल बन सकती थी।

सड़क बदहाल, मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी ग्रामीण सुनील और इलियास खान ने बताया कि गांव में सड़क और आवागमन की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। उनका कहना है कि इंटरलॉकिंग सड़क का प्रस्ताव ब्लॉक प्रमुख स्तर से पास हो चुका है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार गांव की एक प्रमुख गली, जो नरेश के मकान से रामरतन के मकान तक जाती है, बेहद खराब स्थिति में है। बरसात के दौरान यहां कीचड़ भर जाता है और लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है।

गांव में यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे लगभग 300 मीटर तक चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जहां से एंबुलेंस या अन्य वाहन की व्यवस्था हो पाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। निरीक्षण के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई ग्रामीणों ने बताया कि विकासखंड अधिकारी अभिषेक अग्रवाल कई बार सहजन वन और गांव का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन सड़क निर्माण और टूटे गेट को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों पर बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लोगों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। गांव वालों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह इस मामले का संज्ञान लेकर सहजन वन में हुए कथित घटिया निर्माण और विकास कार्यों की जांच कराएंगे, ताकि भविष्य में सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

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