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"Judgment day1 फेसबुक ग्रुप वाले कानून के ज्ञाता (इसमें सभी शामिल हैं वकील एवं न्यायाधीश महोदया)होने के बाबजूद खुद ही उड़ा रहे हैं कानून की धज्जियां"

दिल्ली हाईकोर्ट Judgment day1 फेसबुक ग्रुप वाले कानून के ज्ञाता(इसमें सभी शामिल हैं वकील एवं न्यायाधीश महोदया)होने के बाबजूद खुद ही उड़ा रहे हैं कानून की धज्जियां ।मामला 6 वर्षीय बच्ची के साथ हुए बलात्कार की घटना से संबंधित है, जिसमें आरोपी राजेंद्र शर्मा को pocso ACT के अनुच्छेद 6 एवं IPC का अनुच्छेद 376(2)(f) के अनुसार दोषी पाया गया है।यह मामला 13/01/2013 का है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने दोषी सिद्ध पर 20 वर्ष की कठोर कारावास सुनाई थी, परन्तु एक महिला न्यायाधीश होने के बाबजूद दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश श्रीमती चन्द्रशेखरन सुधा जी ने,यह सजा घटाकर कर 14 वर्ष कर दी,अब यह फैसला उचित है या नहीं ,मैं नहीं कह सकता, क्योंकि कोर्ट अवमानना का केस बना देगी ।किसी भी महिला या बच्ची या बालिका वर्ग की बिना इच्छा, सहमति या अन्य किसी बिना कारण के बुरा या अच्छा स्पर्श करना महिला शोषण के अन्तर्गत माना जाना चाहिए, किन्तु एक महिला न्यायाधीश महोदया जी ने जो फैसला लिया है, मुझे पता नहीं है कि यह संवैधानिक है या नहीं, परन्तु सामाजिक दृष्टि से यह गलत है, परन्तु मैं फैसले को गलत नहीं कह सकता, क्योंकि यह मेरे ऊपर कोर्ट अवमानना का केस हो जाएगा। मेरे हिसाब से अपराधी राजेन्द्र शर्मा को फांसी होनी चाहिए।

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