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भारत-बांग्लादेश सीमा से बचाए गए 23 हजार गौवंशों को चाकुलिया के गोलोक धाम में मिला सुरक्षित आश्रय

Jamshedpur: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया स्थित गोलोक धाम, ध्यान फाउंडेशन गौशाला आज देशभर में गौसेवा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर Border Security Force (BSF) और पुलिस द्वारा गौ तस्करों से बचाए गए करीब 23,000 गौवंशों को यहां जीवनभर के लिए सुरक्षित आश्रय दिया गया है। इनमें लगभग 90 प्रतिशत नंदी और बूढ़ी, गैर-दूध देने वाली गौमाताएं शामिल हैं, जिनकी निःस्वार्थ भाव से सेवा की जा रही है।
करीब 80 एकड़ क्षेत्र में फैली यह विशाल गौशाला केवल गौ संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का भी उदाहरण बन चुकी है। यहां गौवंशों के लिए बड़े-बड़े शेड बनाए गए हैं, ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था है और बीमार एवं घायल गौवंशों के उपचार के लिए विशेष धन्वंतरी वार्ड संचालित किया जाता है। गौशाला में 400 से अधिक आदिवासी श्रमिक कार्यरत हैं, जिनके रोजगार का यह एक बड़ा माध्यम बन चुका है।
ध्यान फाउंडेशन की सेविका डॉ. शालिनी मिश्रा ने बताया कि सीमा से बचाकर लाए गए अधिकांश गौवंश बेहद दयनीय स्थिति में होते हैं। कई भूखे-प्यासे, घायल और कमजोर अवस्था में यहां पहुंचते हैं, जिनकी देखभाल और उपचार में पूरी टीम दिन-रात जुटी रहती है। उनका कहना है कि सेवा का उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं, बल्कि इन गौवंशों को सम्मानजनक जीवन देना है।
संस्था से जुड़े राम व्यास वर्मा ने कहा कि गौ तस्करी माफिया के डर और कई धमकियों के बावजूद संस्था लगातार सेवा कार्य में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि इस सेवा का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय समाज पर भी पड़ा है। गौशाला के कारण क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है।
भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu भी इस सेवा कार्य की सराहना कर चुकी हैं, जिससे संस्था के कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
पूर्व डीआईजी Amrish Arya ने कहा कि ध्यान फाउंडेशन के प्रयासों से सीमा पार होने वाली गौ तस्करी और सीमा पर तैनात जवानों पर होने वाले हमलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
इस दौरान संस्था से जुड़े राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से आग्रह किया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर हो रही गौ तस्करी को पूरी तरह रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि गौ संरक्षण की दिशा में और मजबूती से काम किया जा सके।

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