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*पंचकूला में 'सिद्ध जोगी' भजन उत्सव की धूम: हिमाचली धाम और भजनों की रसधार में डूबे श्रद्धालु*

मनोज शर्मा,पंचकूला | पंचकूला के सेक्टर-10 स्थित कम्युनिटी सेंटर में श्रद्धा,भक्ति और हिमाचली संस्कृति का एक अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। सिद्ध जोगी सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) ट्राईसिटी इनके प्रमुख चेयरमैन विक्रांत शर्मा व प्रधान निर्मल लुवाणा व ऊमेश शर्मा ने बताया वार्षिक 'सर्व साझां भजन उत्सव' और बाबे दा प्रशादा 'हिमाचली धाम' में हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने बाबा बालकनाथ जी का आशीर्वाद लिया और हिमाचल की पारंपरिक विरासत का आनंद लिया। उत्सव का शुभारंभ सुहाने मौसम के बीच श्री गणपति जी की स्तुति और बाबा बालकनाथ जी के पवित्र धूना प्रज्वलन के साथ हुआ। ट्रस्ट के चेयरमैन विक्रांत वावा ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष 6 मई को पूरी परंपरा और मर्यादा के साथ मनाया जाता है। बाबा जी के दिव्य दरबार को फूलों और लाइटों से भव्य रूप से सजाया गया था, जहाँ श्रद्धालुओं ने सामूहिक चालीसा और आरती कर देश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की।
इस अवसर पर ट्राईसिटी और आसपास के क्षेत्रों से आए प्रमुख संत-महात्माओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी दिया। उन्होंने भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हुए समाज में एकता, शांति और सेवा का संदेश दिया।
हिमाचल के विख्यात टीवी गायक अमित मितू और उनकी टीम ने अपनी सुरीली आवाज़ से कार्यक्रम में समां बांध दिया। बाबा बालकनाथ जी के भजनों की ऐसी रसधार बही कि पांडाल में मौजूद श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और भक्ति में सराबोर होकर नाचने लगे।
समाजसेवी पंडित राम कृष्ण शर्मा और माता लक्ष्मी देवी ने इस मौके पर कहा, "अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना ही समाज और राष्ट्र के उत्थान का एकमात्र मार्ग है।"
उत्सव का सबसे विशिष्ट आकर्षण पारंपरिक 'हिमाचली धाम' रहा। भगत रमेश चाचा, राविंद्र नक्कई ने जानकारी दी कि इसे विशेष रूप से हिमाचल से बुलाए गए रसोइयों (बौटियों) द्वारा पीतल के बर्तनों (चरोटियों) में शुद्धता और पौष्टिकता के साथ तैयार किया गया था। ओर धाम को स्वादिष्ट कर दिया।
अंगुर मदरा, सफेद चने मदरा और राजमाह मदरा, पहाड़ी मटर-पनीर मदरा और चना दाल, माह की दाल और काले चने का खट्टा, बदणा व ब्रेड मीठा, पकौड़ा कढी, चावल और रूमाली रोटी हजारों भक्तों ने पंगत में बैठकर टोरी की पतलों (पत्तों से बनी प्लेट्स) पर भोजन किया। इन पारंपरिक पतलों में भोजन करना न केवल सांस्कृतिक अनुभव था, बल्कि इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों की भी सराहना की गई।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों रविन्द्र नकई,भगत रमेश चाचा, प्रवीण रैला ने कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य सामाजिक समरसता और राष्ट्र की समृद्धि है। कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के रोशन लाल, अश्विनी बरवाला, विनोद शर्मा, संदीप सिंह और गुरमीत लुवाणा, दिनेश शर्मा, प्रवीण रैला ,समाजसेवी हरीश शर्मा,अवतार सैणी, पंकज ने सभी अतिथियों और भक्तों का आभार व्यक्त किया।
ट्राईसिटी में यह उत्सव अपनी शुद्ध हिमाचली संस्कृति और पारंपरिक स्वाद के लिए पहचाना जाता है। टोरी की पत्तल में परोसा जाने वाला भोजन न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को उनकी प्राचीन जीवनशैली से भी जोड़ता है।

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