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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने चुनाव प्रक्रिया, महंगाई और हीटवेव पर जताई गंभीर चिंता

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने चुनाव प्रक्रिया, महंगाई और हीटवेव पर जताई गंभीर चिंता

समावेशी विकास और जन-केंद्रित नीतियों की आवश्यकता पर दिया ज़ोर

नई दिल्ली, 06 मई 2026:
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के शीर्ष नेतृत्व ने देश में हालिया राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, चुनाव के बाद हुई हिंसा, बढ़ती महंगाई तथा भीषण हीटवेव के संकट को गंभीर मुद्दा बताया है। यह बातें जमाअत-ए-इस्लामी हिंद मुख्यालय में आयोजित मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गईं।

जमाअत के उपाध्यक्ष मलिक मोअतसिम खान ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई और पुनः निर्वाचित सरकारों को समावेशी, ज़िम्मेदार और जन-केंद्रित शासन व्यवस्था अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश वर्तमान समय में आर्थिक संकट, बेरोज़गारी, बढ़ती महंगाई, शिक्षा, विकास और सामाजिक न्याय से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिन पर केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल कानून-व्यवस्था बहाल करने तथा हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की। मलिक मोअतसिम खान ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और मतदाता सूची में संशोधन, हाशिए पर खड़े समुदायों को मताधिकार से वंचित किए जाने तथा प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग से संबंधित रिपोर्टों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान ध्रुवीकरण करने वाले नैरेटिव ने लोकतांत्रिक वातावरण को प्रभावित किया है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं।

उन्होंने असम समेत अन्य राज्यों में धनबल, दुष्प्रचार और विभाजनकारी भाषा के प्रयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियाँ लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करती हैं। उन्होंने चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होना जनता के विश्वास को कमजोर करता है।

मलिक मोअतसिम खान ने यह भी कहा कि धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करने वाले राजनीतिक दल आपसी मतभेदों के कारण एकजुट मोर्चा बनाने में विफल रहे हैं, जिससे विभाजनकारी शक्तियों का मुकाबला करने की उनकी क्षमता कमजोर हुई है। उन्होंने विपक्षी दलों से रचनात्मक और ज़िम्मेदार भूमिका निभाने तथा मुद्दा-आधारित वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जमाअत के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने बढ़ती महंगाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि LPG, पेट्रोल-डीज़ल और बिजली की बढ़ती कीमतों ने आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि परिवहन लागत और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि से निम्न और मध्यम आय वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार बढ़ती महंगाई का कारण ईंधन की कीमतें, बढ़ती लागत और वैश्विक ऊर्जा संकट हैं।

उन्होंने सरकार से उत्पाद शुल्क में कटौती, VAT को युक्तिसंगत बनाने तथा पेट्रोल और डीज़ल को GST के दायरे में लाने जैसे कदमों पर विचार करने का आग्रह किया। इसके अलावा उन्होंने आपूर्ति व्यवस्था को मज़बूत करने, लॉजिस्टिक्स में सुधार, आवश्यक वस्तुओं के बफर स्टॉक और जमाखोरी पर सख्त निगरानी की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि कमज़ोर वर्गों को लक्षित राहत उपलब्ध कराना समय की मांग है।

हीटवेव और पर्यावरणीय संकट पर बोलते हुए प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि बढ़ते तापमान का गंभीर प्रभाव आम लोगों, विशेष रूप से बाहरी श्रमिकों, शहरी गरीबों और कमजोर तबकों पर पड़ रहा है। उन्होंने हीटवेव की बढ़ती घटनाओं को पर्यावरणीय क्षरण, वनों की कटाई और अनियंत्रित शहरीकरण से जोड़ते हुए कहा कि प्राकृतिक संतुलन को लगातार नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

उन्होंने सरकार से हीट एक्शन प्लान लागू करने, पीने के पानी और ठंडक की सुविधाएँ बढ़ाने, कार्य समय को विनियमित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत करने की मांग की। साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की परियोजनाओं की समीक्षा, शहरी हरित क्षेत्र के विस्तार, जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर आधारित सतत विकास नीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर
डॉ. एम.डी. फिरोज आलम
जनरल फिजिशियन एवं निदेशक, अलीना हेल्थ केयर, नरैनी
जिला अध्यक्ष, AIMA MEDIA
सदस्य, जमीयत उलेमा-ए-हिंद
Cybersecurity Volunteer

मोबाइल: 8969285878

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