अंजू (एंजेल शर्मा): संघर्ष से सेवा तक का सफर
मूल निवासी: अंजू मूल रूप से चंबा जिले के भरमौर (घरोला गांव) की रहने वाली हैं, लेकिन उनका परिवार अब नूरपुर के पास गंगथ में रहता है।
प्रेरणा: उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके जीवन में एक ऐसी दुखद घटना घटी (परिवार के किसी सदस्य को समय पर अस्पताल न पहुँचा पाना), जिसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वह खुद एम्बुलेंस चलाकर दूसरों की जान बचाएंगी।
अनुभव: एम्बुलेंस चलाने से पहले, अंजू ने अपने इलाके में लगभग 5 साल तक प्राइवेट टैक्सी चलाई है।
प्रशिक्षण और चयन
विशेष ट्रेनिंग: उन्होंने नूरपुर के जसूर (Jassur) स्थित HRTC ड्राइविंग स्कूल से 60 दिनों का कड़ा प्रशिक्षण लिया, ताकि वह आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस को संभाल सकें।
संस्था का सहयोग: रंजीत बख्शी जन कल्याण सभा के निदेशक अखिल बख्शी ने उनका चयन न केवल उनकी ड्राइविंग स्किल्स, बल्कि मरीजों की देखभाल करने के उनके जज्बे को देखकर किया।
इंटरव्यू की मुख्य बातें
अपने इंटरव्यू में उन्होंने समाज को एक कड़ा संदेश दिया:
साहस: उन्होंने कहा कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और लड़कियां आज हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं।
कर्तव्य: वह नूरपुर सिविल अस्पताल से मरीजों को प्रदेश के अंदर और बाहर (जैसे टांडा मेडिकल कॉलेज या पंजाब) ले जाने का काम पूरी निष्ठा से कर रही हैं।
मसीहा के रूप में: इलाके के लोग उन्हें "जांबाज बेटी" कहकर पुकार रहे हैं क्योंकि वह रात के समय भी पहाड़ी रास्तों पर एम्बुलेंस ले जाने से नहीं कतरातीं।