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पंजाब के गांव ने जनाज़े में नई सहानुभूति की मिसाल कायम की

पंजाब: पंजाब के एक गांव ने जनाज़े की रस्म को बदलकर एक नई मिसाल कायम की है। जहां एक गरीब शख्स का जनाज़ा कब्रिस्तान पहुंचा, वहां ईमाम साहब ने उपस्थित लोगों से मुखातिब होकर एक दिल छू लेने वाला ऐलान किया। मृतक इस परिवार का एकलौता क़रीबी सहारा था, जिसकी मृत्यु के बाद पीछे केवल एक विधवा और तीन छोटे बच्चे रह गए। इद्दत के दिनों में परिवार के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं था।

कब्रिस्तान के मुख्य गेट पर एक चादर बिछाई गई, जिसमें लोगों से विनम्र अपील की गई कि वे अपनी हैसियत के अनुसार जरूरतमंद बच्चों के लिए आर्थिक मदद करें। तदफ़ीन के बाद जमा की गई रकम एक लाख रुपए से अधिक थी, जो बच्चों के लिए कई महीनों का खर्चा पूरा करने के लिए पर्याप्त थी। इस पहल ने साबित किया कि ताजियत केवल दुआओं तक सीमित नहीं, बल्कि दुःख की घड़ी में अमली सहारा बनने का नाम है।

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