चुनाव आयोग द्वारा डिजिटल डाटा संरक्षण पर विवाद
सभी विभागों में कर्मचारियों के डाटा को जीवन पर्यंत सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन चुनाव आयोग लोकसभा और विधानसभा के बूथ स्तर के डाटा को केवल 45 दिनों के भीतर डिजिटल रूप से डिलीट कर देता है। यह स्थिति उत्तर के डाटा के संरक्षण से विपरीत है, जिसे जीवन भर सुरक्षित रखा जाता है।
चुनाव आयोग के इस निर्णय के कारण सवाल उठ रहे हैं कि क्या लोकसभा और विधानसभा के डाटा को कम से कम पांच वर्ष तक केंद्र और राज्य सरकारों की अवधि तक सुरक्षित रखना चाहिए। साथ ही, आम जनता और जनप्रतिनिधियों को आरटीआई के माध्यम से इस डाटा तक पहुंच का अधिकार होना चाहिए, जबकि चुनाव आयोग इसे जनप्रतिनिधि और न्यायिक अधिकारियों को दिखाने से मना करता है, जिसे संवैधानिक अपराध माना जा रहा है।