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सामाजिक समरसता से ही राष्ट्र करेगा निरंतर प्रगति : डॉ. मोहन भागवतमैसूर में विशेष व्याख्यान, आत्मनो मोक्षार्थं जगत हितायच पुस्तक का विमोचन

बेंगलुरू/मैसूर(दलपतसिंह भायल ) आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने JSS महाविद्यापीठ में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्र की प्रगति के लिए सामाजिक समरसता विषय पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में संत समाज, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी सांस्कृतिक एकता, सामाजिक सद्भाव और समरसता में निहित है। उन्होंने कहा कि जब समाज जाति, भाषा, क्षेत्र और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होकर कार्य करता है, तभी राष्ट्र वास्तविक विकास की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने समाज में पारस्परिक सम्मान, सहयोग और सेवा भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. भागवत ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों से भी सुनिश्चित होती है। उन्होंने युवाओं से समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सुत्तूर क्षेत्र के पूज्य जगद्गुरु शिवरात्रि दक्षिकेंद्र महास्वामी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत एवं महास्वामीजी ने संयुक्त रूप से आत्मनो मोक्षार्थं जगत हितायच पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में भारतीय जीवन मूल्यों, आध्यात्मिक चिंतन एवं समाज सेवा के संदेश को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आयोजन के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

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