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गिरल लिग्नाइट माइंस में उबाल: 28 दिनों से जारी श्रमिक आंदोलन में तीसरे दिन भी धरनास्थल पर डटे रहे शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी

#बाड़मेर
बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में पिछले 28 दिनों से जारी श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन अब लगातार उग्र और व्यापक होता जा रहा है। स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन को उस समय नई ताकत और राजनीतिक धार मिली, जब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी लगातार तीसरे दिन भी धरनास्थल पर डटे रहे। बीते दो दिनों से विधायक भाटी धरनास्थल पर ही रात्रि विश्राम कर रहे हैं, जिससे आंदोलनकारियों का मनोबल लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

धरनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रमिक, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग लगातार पहुँच रहे हैं। आंदोलन अब केवल मजदूरों की कुछ मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय अधिकारों, श्रमिक सम्मान, रोजगार सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कॉर्पोरेट जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

मीडिया को साथ लेकर माइंस का निरीक्षण, खुली सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल

बुधवार को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सभी प्रमुख मीडिया प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाकर R.S.M.M. द्वारा संचालित गिरल लिग्नाइट माइंस का विस्तृत निरीक्षण करवाया। निरीक्षण के दौरान माइंस क्षेत्र में सुरक्षा नियमों और श्रमिक हितों से जुड़े मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई।

निरीक्षण के दौरान कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने कंपनी प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ कई स्थानों पर नदारद दिखाई दीं। भारी मशीनरी, खनन क्षेत्र और कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों की अवहेलना स्पष्ट रूप से नजर आई।

विधायक भाटी ने मीडिया के सामने कहा कि करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाली कंपनी यदि श्रमिकों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं तक का ध्यान नहीं रख पा रही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मजदूर केवल श्रम का साधन नहीं बल्कि इस पूरे उद्योग की रीढ़ हैं, और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बड़ा सवाल

निरीक्षण के दौरान पर्यावरण से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने सरकार से शीशम और नीम जैसे पर्यावरण हितैषी पेड़ लगाने के नाम पर धनराशि प्राप्त की, लेकिन मौके पर वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग दिखाई दी।

धरातल पर जहाँ हरियाली विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण के दावे किए गए थे, वहाँ बड़ी संख्या में अंग्रेज़ी बबूल के पेड़ पाए गए। अंग्रेज़ी बबूल को पर्यावरण के लिए हानिकारक माना जाता है और कई क्षेत्रों में इन्हें हटाने के लिए सरकार स्वयं अलग से बजट खर्च करती है।

भाटी ने इस पूरे मामले को गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा कि यदि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी क्षेत्र में पर्यावरण पहले ही संवेदनशील स्थिति में है और ऐसे में इस प्रकार की लापरवाही भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।

तीसरे दिन कंपनी का प्रतिनिधिमंडल पहुँचा धरनास्थल

लगातार बढ़ते दबाव और आंदोलन के विस्तार के बीच धरने के तीसरे दिन R.S.M.M. का एक प्रतिनिधिमंडल आंदोलनरत ग्रामीणों और श्रमिकों से मिलने पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारियों की मांगों को विस्तार से सुना और आगे वार्ता का आश्वासन दिया।

ग्रामीणों और श्रमिकों ने प्रतिनिधिमंडल के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें कंपनी द्वारा हटाए गए 100 से अधिक ड्राइवरों को पुनः कार्य पर बहाल करना सबसे प्रमुख रहा। इसके अलावा सभी श्रमिकों की ड्यूटी केवल आठ घंटे निर्धारित करने, स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने, मजदूरों को उच्च कुशल वर्ग के अनुसार वेतन देने, बोनस एक्ट 1965 के तहत बोनस उपलब्ध करवाने तथा श्रमिकों को आईडी कार्ड, वेतन स्लिप, गेट पास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करवाने जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

धरने पर बैठे श्रमिकों ने कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उनका कहना था कि कंपनी केवल उत्पादन और मुनाफे पर ध्यान दे रही है जबकि श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान की लगातार अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों की आवाज दबाने नहीं देंगे रविंद्र सिंह भाटी

धरनास्थल पर मौजूद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंपनी प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ग्रामीणों और श्रमिकों की जायज़ मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और बड़े स्तर तक ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। भाटी ने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार से बाहर करना, श्रमिकों पर अत्यधिक कार्यभार डालना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक श्रमिकों और ग्रामीणों को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे धरनास्थल पर उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।

क्षेत्र में बढ़ता जनसमर्थन, आंदोलन बना चर्चा का विषय

गिरल लिग्नाइट माइंस का यह आंदोलन अब पूरे बाड़मेर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा लगातार आंदोलन के समर्थन में आगे आ रहे हैं।

धरनास्थल पर लगातार बढ़ती भीड़ यह संकेत दे रही है कि स्थानीय लोगों में कंपनी की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक रवैये को लेकर भारी नाराजगी है। वहीं विधायक रविंद्र सिंह भाटी की लगातार मौजूदगी ने आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ी मजबूती प्रदान की है।

अब सभी की निगाहें कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

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