logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी साहब,

हजरत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (र.अ.) के मुरीद और खास खलीफा हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी साहब, जब अजमेर तशरीफ़ लाए थे, तो इसी जगह पर आपने इबादत की थी और अपना चिल्ला किया था।

यहाँ से फिर आप दिल्ली तशरीफ़ ले गए और दिल्ली को ही अपना स्थायी ठिकाना (घर) बना लिया। साल 1236 ईस्वी में दिल्ली में ही आपका इंतकाल हुआ और आपकी मुबारक दरगाह आज भी दिल्ली के महरौली इलाके में मौजूद है, जहाँ दुनिया भर से जायरीन हाजिरी देने आते हैं।

साल 1776 में हजरत मौलवी शम्सुद्दीन साहब ने यहाँ अजमेर के इसी चिल्ला शरीफ पर एक गुंबद वाली मस्जिद तामीर करवाई थी। मस्जिद के सहन (आंगन) में टोंक के नवाब के अफसर हजरत मोहम्मद शाह खान साहब का मजार है, और उनके नायब ने साल 1824 में यहाँ एक और मस्जिद बनवाई थी।

इसी इलाके में उत्तर-पूर्व की तरफ 1669 ईस्वी के गवर्नर हजरत सैयद अहमद साहब के बाग के आसार (अवशेष) और हजरत असद खान साहब की बावड़ी मौजूद है। इसके पास ही एक बुलंदी पर हजरत शेख यह्या साहब की बनवाई हुई पुरानी मस्जिद है, जो औरंगजेब के अहद (शासनकाल) की है। इस मस्जिद की देखभाल के लिए हजरत असद खान साहब ने 40 बीघा जमीन वक्फ (दान) की थी।

0
0 views

Comment