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युवाओं की रगों में घुलता 'सूखा जहर': क्या हम अपने भविष्य को खुद ही मिटा रहे हैं

8 मई, 2026
भागलपुर | आज का युवा देश की प्रगति का आधार है, लेकिन दुर्भाग्यवश युवाओं का एक बड़ा हिस्सा 'सूखे नशे' (सिंथेटिक ड्रग्स, पाउडर, गोलियां) के ऐसे दलदल में फंसता जा रहा है, जहाँ से वापसी का रास्ता धुंधला होता जा रहा है। यह अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और मानसिक महामारी का रूप ले चुका है।
भागलपुर जिला भी इस समस्या से अछूता नहीं है। पुलिस प्रशासन इस खतरे से निपटने के लिए लगातार सक्रिय है। एसएसपी भागलपुर, प्रमोद कुमार ने कई मौकों पर नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने और युवाओं को बचाने के लिए सामाजिक भागीदारी पर जोर दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ परिवार और समाज का जागरूक होना भी उतना ही जरूरी है।
क्यों बढ़ रहा है 'सूखे जहर' का चलन?
विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे कई गहरे सामाजिक और मानसिक कारण छिपे हैं:
पढ़ाई का बोझ, करियर की अनिश्चितता और बढ़ते अकेलेपन के बीच युवा 'क्षणभंगुर शांति' की तलाश में इन घातक पदार्थों की ओर खिंचे चले जा रहे हैं।
दोस्तों के बीच "कूल" दिखने की चाहत और "सिर्फ एक बार ट्राई करने" की जिज्ञासा अक्सर जीवन भर की तबाही का कारण बन जाती है।भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता और बच्चों के बीच बढ़ती दूरियां युवाओं को भावनात्मक रूप से कमजोर बना रही हैं, जिसका फायदा नशा तस्कर आसानी से उठाते हैं।यदि आपके आसपास भी किसी युवा के व्यवहार में ये बदलाव दिखें, तो सावधान हो जाएं:
अचानक एकांतप्रिय या चिड़चिड़ा हो जाना।चोरी करना या पैसों की मांग करना।नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि हम सबकी है। बच्चों को डांटने या उन पर शक करने के बजाय उनके दोस्त बनें। उन्हें विश्वास दिलाएं कि वे अपनी हर समस्या आपसे साझा कर सकते हैं।
याद रखें, नशा एक बीमारी है। यदि स्थिति गंभीर है, तो मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने में संकोच न करें।
वक्त आ गया है कि हम अपनी नींद से जागें। सूखे नशे की यह गिरफ्त हमारे आने वाले कल को खोखला कर रही है। एक जागरूक परिवार, सख्त पुलिसिंग और सशक्त समाज ही इस 'सूखे जहर' को हरा सकता है।
हमारी अपील: आइए, हम सब मिलकर एक नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें। नशे को 'ना' कहें और जीवन को 'हां'।
आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि समाज की चुप्पी और पुलिस की कार्रवाई में समन्वय की कमी इस समस्या को और बढ़ा रही है? क्या भागलपुर में नशे के खिलाफ अभियान और तेज होना चाहिए? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में अवश्य दें।

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