विंध्याचल: भैरवनाथ की त्रिशिरा चामुंडेश्वरी साधना की कथा
विंध्याचल के घने वनों में एक प्राचीन श्मशान था जहाँ भैरवनाथ नामक वृद्ध तांत्रिक वर्षों से एक विशेष शक्ति की साधना कर रहा था। उसे अपने गुरु द्वारा दिया गया एक गुप्त मंत्र अमावस्या की रात श्मशान में उच्चारित करना था। इस अनुष्ठान के दौरान, अग्नि और खोपड़ियों के मंडल के बीच एक विशाल काला तेंदुआ प्रकट हुआ, जिसके ऊपर त्रिशिरा चामुंडेश्वरी देवी विराजमान थीं।
देवी ने भैरवनाथ को बताया कि भय को जीतने के लिए स्वयं के भीतर के अंधकार को पार करना आवश्यक है। इस घटना के बाद भैरवनाथ की दृष्टि इतनी प्रखर हो गई कि वह व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा को पहचान सकता था, परंतु उसने शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया। कहा जाता है कि इस देवी का ध्यान करने से साधकों को अद्भुत आत्मबल और अदृश्य सुरक्षा की अनुभूति होती है।