प्रयागराज: गंगा जल से प्रेत की मुक्ति का वर्णन
प्रयागराज: एक ब्राह्मण जो माघ मास की संक्रांति पर त्रिवेणी में स्नान करता था, बीमार होने के कारण अपने पुत्र को गंगा जल लाने और स्नान कराने का आदेश देता है। पुत्र त्रिवेणी में स्नान कर जल लेकर जा रहा था, तभी उसे एक प्रेत मिला जो गंगाजल पीकर मुक्त होना चाहता था। प्रेत ने बताया कि वह क्रोधवश ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मण की हत्या के कारण ब्रह्मराक्षस बना था और आठ वर्षों तक इस अवस्था में रहा।
प्रेत की इच्छा थी कि वह गंगाजल पाकर मुक्त हो जाए। ब्राह्मणपुत्र ने अपने पिता के नियम के कारण पहले हिचकिचाया, लेकिन प्रेत ने उपाय सुझाया कि पहले उसे जल पिला दे और नेत्र बंद करके वह अपने पिता के पास पहुंच जाएगा। पुत्र ने ऐसा किया और गंगाजल लेकर अपने पिता के पास पहुंच गया। इस कथा के माध्यम से गंगाजी के पुण्य और उसके पाप नाशक प्रभाव का उल्लेख भगवान व्यास और भगवान शंकर के वचनों से किया गया है।