पश्चिम बंगाल के से एक बेहद संवेदनशील और चर्चित घटनाक्रम सामने आया है:-
पश्चिम बंगाल के से एक बेहद संवेदनशील और चर्चित घटनाक्रम सामने आया है, जहां बस्तिन बाजार क्षेत्र स्थित एक दुर्गा मंदिर लगभग वर्षों बाद फिर से नियमित रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। लंबे समय तक बंद रहने के बाद मंदिर के कपाट खुलने से स्थानीय लोगों और भक्तों में भारी उत्साह देखा गया, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद भड़की हिंसा और तनावपूर्ण माहौल के कारण पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह दुर्गा मंदिर पिछले डेढ़ दशक से विभिन्न विवादों, प्रशासनिक प्रतिबंधों और संवेदनशील परिस्थितियों के चलते नियमित पूजा-पाठ के लिए बंद था। हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मंदिर में फिर से पूजा-अर्चना शुरू हुई है। मंदिर खुलने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इलाके में रैपिड एक्शन फोर्स (), सशस्त्र पुलिसकर्मी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और आने-जाने वाले लोगों की जांच भी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में पोस्ट-पोल हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक या राजनीतिक तनाव की स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। इसी कारण मंदिर और उसके आसपास का क्षेत्र फिलहाल एक सुरक्षा किले जैसा दिखाई दे रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने मंदिर खुलने को आस्था की वापसी बताया है। कई लोगों का कहना है कि वर्षों बाद नियमित आरती, पूजा और धार्मिक गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल फिर से जीवंत हुआ है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस लगातार सोशल मीडिया गतिविधियों और अफवाहों पर भी नजर रख रही है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैल सके।आसनसोल का यह घटनाक्रम अब पश्चिम बंगाल की राजनीति, धार्मिक संवेदनशीलता और चुनाव बाद के माहौल के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।