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असम में नई भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं।

2026 विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद अब पूरे राज्य की नजर नई एचबीएस 2.0 कैबिनेट पर टिकी हुई है। राजनीतिक गलियारों, पार्टी कार्यालयों और प्रशासनिक स्तर पर लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। माना जा रहा है कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता संभालेंगे।सूत्रों के अनुसार नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 12 मई को आयोजित किया जा सकता है। भाजपा नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की अंतिम तिथि तय की जाएगी। यदि प्रधानमंत्री मोदी समारोह में शामिल होते हैं तो यह आयोजन भाजपा और एनडीए के लिए एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाएगा।राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार नई कैबिनेट में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ कई नए चेहरों को भी अवसर मिल सकता है। संभावित मंत्रियों की सूची में अतुल बोरा, डॉ. रणोज पेगू, जयंत मल्ला बरुआ, पीयूष हजारिका, अशोक सिंघल, हितेन गोस्वामी तथा बिस्वजीत दैमारी जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय संतुलन, जनजातीय प्रतिनिधित्व, महिला भागीदारी तथा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछ नए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि इस बार मंत्रिमंडल गठन में युवा चेहरों और प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारियों का वितरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भाजपा नेतृत्व उत्तर असम, बराक घाटी, बोडोलैंड क्षेत्र और ऊपरी असम सहित विभिन्न क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रहा है। सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में उचित भागीदारी मिलने की संभावना है। भाजपा नेतृत्व इस चुनावी जीत को ऐतिहासिक जनादेश मान रहा है। एनडीए गठबंधन ने 100 से अधिक सीटें हासिल कर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है, जिसे राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जनादेश केवल सत्ता वापसी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व और भाजपा की संगठनात्मक रणनीति पर जनता की मजबूत मुहर भी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नई एचबीएस 2.0 सरकार विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अधिक आक्रामक और परिणाममुखी नीति के साथ आगे बढ़ सकती है। साथ ही आगामी वर्षों में लोकसभा चुनाव और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह मंत्रिमंडल भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

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