पहेली गुटका की कालाबाजारी: क्या डीलरों की मिलीभगत है?
कोतमा। क्षेत्र में इन दिनों पहेली गुटका की कृत्रिम किल्लत और ऊंचे दामों पर बिक्री को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। स्थानीय बाजारों से पहेली गुटका अचानक गायब हो गया है, और जहाँ मिल भी रहा है, वहां निर्धारित दर से काफी अधिक कीमतों पर बेचा जा रहा है। इस स्थिति ने अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या इस कालाबाजारी के पीछे सीधे तौर पर डीलरों का हाथ है?
किल्लत या सोची-समझी साजिश?
सूत्रों की मानें तो गुटका उत्पादकों की ओर से आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा नहीं है, फिर भी स्थानीय स्तर पर फुटकर व्यापारियों को माल नहीं मिल रहा। आरोप लग रहे हैं कि बड़े डीलरों ने स्टॉक को डंप कर दिया है ताकि बाजार में मांग बढ़े और फिर उसे "ब्लैक" में ऊंचे दामों पर निकाला जा सके।