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बारूद के धमाकों से दहल रहा बिलगढ़ा, इंटेकवेल निर्माण के नाम पर जलीय संरचना के पास विस्फोट ! एफआईआर के बाद भी नहीं थम रही मनमानी

डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य डिंडोरी जिले में विकास कार्यों की आड़ में विस्फोटकों का बेखौफ इस्तेमाल अब गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। ताजा मामला विकासखंड शहपुरा के बिलगढ़ा बांध क्षेत्र का है, जहां इंटेकवेल निर्माण के नाम पर संवेदनशील जलीय संरचना के बेहद करीब भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। हैरत की बात यह है कि निर्माण स्थल जलाशय की संरचना से महज 50 फीट की दूरी पर बताया जा रहा है, जबकि बांध के गेट की दूरी भी लगभग 100 से 150 मीटर के बीच है। ऐसे में यदि किसी बड़े हादसे की आशंका सच साबित हो जाए तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी?
स्थानीय लोगों के अनुसार बीते कई दिनों से बिलगढ़ा क्षेत्र बारूद के धमाकों से गूंज रहा है। आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक बार में लगभग 300 जिलेटिन छड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, पुलिस और संबंधित विभागों को बिना पूर्व सूचना दिए विस्फोट किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। मौके पर करीब 40 से 50 मीटर तक खुदा विशाल गड्ढा इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि कार्य किस स्तर पर किया जा रहा है।
पहले भी दर्ज हो चुकी है एफआईआर
गौरतलब है कि इससे पहले भी बिलगढ़ा जलाशय क्षेत्र में बिना अनुमति विस्फोटक उपयोग के मामले में शहपुरा पुलिस द्वारा कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जानकारी के मुताबिक उक्त क्षेत्र में जल निगम की वृहद परियोजना के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण मेसर्स जी ए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। बावजूद इसके, कार्रवाई का भय निर्माण एजेंसी पर दिखाई नहीं दे रहा।
भाजपा के बड़े नेता के नाम का सहारा?
मामला उस वक्त और अधिक चर्चाओं में आ गया जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची। वहां मौजूद एक राजस्थानी व्यक्ति ने खुले तौर पर यह दावा किया कि विस्फोटक का उपयोग भाजपा के एक आदमकद जनप्रतिनिधि के कहने पर किया जा रहा है, जिनकी पकड़ डिंडोरी-मंडला ही नहीं बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति तक बताई जाती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यह केवल नाम का इस्तेमाल कर दबाव बनाने की कोशिश है या फिर वास्तव में किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण में पूरा खेल संचालित हो रहा है?
जल संसाधन विभाग ने रोका था काम
इस पूरे मामले पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री ने दो दिन पूर्व जानकारी देते हुए बताया था कि उन्हें विस्फोटक उपयोग की सूचना मिली थी, जिसके बाद तत्काल काम रोकने के निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, संबंधित एजेंसी को पत्राचार कर जवाब भी तलब किया गया था। लेकिन विभागीय निर्देशों के बावजूद कार्य जारी रहना कई सवालों को जन्म दे रहा है। आखिर किसके दम पर संवेदनशील जल संरचना के आसपास लगातार विस्फोट किए जा रहे हैं?
दहशत में स्थानीय ग्रामीण
बारूद के लगातार धमाकों से आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि कंपनियों की बेलगाम कार्यशैली से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जल संरचनाओं और आमजन की सुरक्षा से खिलवाड न हो।

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