गोंडा का बड़गांव ओवरब्रिज दे रहा खतरे का संकेत, जिम्मेदार आखिर कहां हैं गोंडा का बड़गांव ओवरब्रिज कोई नया पुल नहीं है, यह एक लंबी कहानी है, एक इतिहास
गोंडा का बड़गांव ओवरब्रिज दे रहा खतरे का संकेत, जिम्मेदार आखिर कहां हैं
गोंडा का बड़गांव ओवरब्रिज कोई नया पुल नहीं है,
यह एक लंबी कहानी है,
एक इतिहास है,
और अब धीरे-धीरे एक चिंता का विषय बनता जा रहा है।
इस पुल का शिलान्यास वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी द्वारा किया गया था।
यानी यह पुल आज करीब 40 साल पुराना हो चुका है।
समय बदला, ट्रैफिक बढ़ा, गाड़ियां बढ़ीं,
लेकिन इस पुल की संरचना लगभग वैसी ही बनी रही।
आज यह पुल सिर्फ एक रास्ता नहीं है,
बल्कि गोंडा से बलरामपुर, श्रावस्ती, तुलसीपुर, गैसड़ी और सिद्धार्थनगर जैसे कई जिलों को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन बन चुका है।
जानकारी के अनुसार
इस पुल से हर दिन 10 हजार से ज्यादा लोग और सैकड़ों वाहन गुजरते हैं।
मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ तक जाने के लिए भी इसी पुल का सहारा लेना पड़ता है।
यानी यह पुल बंद हुआ तो पूरा इलाका ठप हो सकता है।
लेकिन अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि
पुल के जॉइंट पर 3 से 4 इंच तक का गैप बन चुका है,
और कई जगह गहरे गड्ढे दिखाई देते हैं।
वाहन जब इस हिस्से से गुजरते हैं
तो तेज झटका लगता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
सबसे चिंता की बात यह है कि
कुछ स्थानों पर दरार और जॉइंट की समस्या को ठीक करने के लिए
अस्थायी तरीके अपनाए गए हैं,
जिसमें दरार के अंदर कपड़ा या अन्य सामग्री भरकर
यातायात को चालू रखा गया है।
यानी स्थायी समाधान के बजाय
जुगाड़ के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है।
इसी बीच कुछ दिन पहले एक गंभीर हादसा भी सामने आया था।
नवंबर 2025 में इसी बड़गांव ओवरब्रिज पर एक मिक्सिंग मशीन (टैंकर) अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 40 फीट नीचे गिर गई थी।
हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग दहशत में बाहर निकल आए थे।
इस दुर्घटना में चालक और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि
यह इस पुल पर पहली घटना नहीं थी,
इससे पहले भी वाहन रेलिंग तोड़कर नीचे गिर चुके हैं,
जिससे लोगों के मन में लगातार डर बना हुआ है।
इस पुल की एक और बड़ी समस्या यह है कि
यह पुल घुमावदार बना हुआ है।
तेज रफ्तार से आने वाले वाहन कई बार नियंत्रण खो देते हैं
और पहले भी कई हादसे हो चुके हैं,
जिसमें लोगों की जान तक जा चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि
पुल की रेलिंग भी कई जगह टूट चुकी है
और भारी वाहन गुजरते समय कंपन साफ महसूस होता है।
यानी खतरे के संकेत बार-बार सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है
जब पुल 40 साल पुराना हो चुका है
जब रोज 10 हजार से ज्यादा लोग इस पर निर्भर हैं
जब दरार और गड्ढे साफ दिखाई दे रहे हैं
जब अस्थायी मरम्मत के सहारे पुल चल रहा है
जब हाल ही में रेलिंग तोड़कर वाहन नीचे गिर चुका है
तो फिर स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
यह सिर्फ एक पुल की बात नहीं है।
यह हजारों लोगों की सुरक्षा की बात है।
यह बच्चों के स्कूल जाने की बात है।
यह मरीजों के समय पर अस्पताल पहुंचने की बात है।
यह व्यापार और रोजी-रोटी की बात है।
आज गोंडा के लोगों के सामने एक ही सवाल है
क्या हम चुप रहेंगे?
या समय रहते समाधान की मांग करेंगे?
अगर आप भी चाहते हैं कि
इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार विभाग तुरंत कार्रवाई करे
तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
क्योंकि कई बार एक आवाज
किसी बड़ी दुर्घटना को रोक सकती है।
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