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व्यवस्था परिवर्तन का असर: टॉप-100 में आधे से ज्यादा टॉपर सरकारी स्कूलों से, पास प्रतिशत 92% के पार

शिमला, 06 मई 2026
रिपोर्ट : देवेश आर्य, मण्डी (हिमाचल प्रदेश)

शिक्षा विभाग में किए जा रहे व्यवस्था परिवर्तन के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू जी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का असर परीक्षा परिणामों में दिखाई दे रहा है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी स्तर पर निजी स्कूलों से कम नहीं हैं।

इस वर्ष हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं परीक्षा के परिणामों में 50 से अधिक सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी मेरिट सूची के टॉप-100 में शामिल हुए हैं। यानी आधे से ज्यादा टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। इस वर्ष टॉप-100 में 48 छात्राओं और 10 छात्रों ने स्थान बनाया, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 41 छात्राओं और 9 छात्रों की थी। वर्ष 2024 में 23 छात्राएं और 7 छात्र तथा वर्ष 2023 में 33 छात्र और 9 छात्राएं टॉप-100 में स्थान बनाने में सफल रहे थे।

पास प्रतिशत में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इस वर्ष सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 92.02 रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। वर्ष 2025 में यह 88.64 प्रतिशत, 2024 में 73.76 प्रतिशत तथा 2023 में 79.40 प्रतिशत था।

कई वर्षों के बाद इस बार 12वीं का ओवरऑल टॉपर भी सरकारी स्कूल से आया है। अंशित कुमार, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भवारना के छात्र, ने 99.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया। उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ने स्वयं फोन पर बधाई दी।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहले दिन से ही व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में काम किया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने इस सफलता का श्रेय विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को दिया। उन्होंने बताया कि सुधारों के चलते हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पूर्व में राज्य 21वें स्थान पर था।

राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए 12वीं कक्षा तक अलग निदेशालय और उच्च शिक्षा के लिए अलग निदेशालय का गठन किया गया है। शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोजर विजिट, स्मार्ट यूनिफॉर्म की स्वतंत्रता और क्लस्टर प्रणाली जैसे नवाचार लागू किए गए हैं।

इस संबंध में डॉ. राजेश शर्मा, अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नई तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के प्रयास जारी हैं, जिससे भविष्य में और बेहतर परिणाम आने की उम्मीद है।

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