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विरोध - गुरुघासीदासजयंत.को मात्र एक दिन 18दिसंबर को मनाने का निर्णय गलत हैँ एक साजिशहै,

*गुरुघासीदास जयंती को मात्र 1दिन 18 दिसम्बर को ही मनाने के निर्णय का भारी विरोध ----*

सतनामी समाज की आत्मा, सतनामी समाज की आन बान शान पहचान, सतनामी समाज के मूल कला संस्कृति के जन्मदाता जयंती पर्व को ही ख़त्म करने का प्रयास सतनामी समाज के लोग ही प्रारम्भ कर दिए हैँ,, जी हां आपने सही सुना, इस प्रकार का कुतषित प्रयास और समाज विरोधी निर्णय विगत 1 मई को रायपुर मे प्रगतिशील छग सतनामी समाज के द्वारा आयोजित बैठक मे लिया गया हैँ,, यह पुरे समाज के लिये आत्मघाती कदम हैँ,, पुरे दिसम्बर महीना को गुरूपर्व के रूप मे मनाया जाता हैँ, विश्वभर मे केवल गुरुघासीदास जयंती ही एक मात्र पर्व हैँ जिसे लगातार महीनो तक उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जाता हैँ, जिस बाबा गुरुघासीदास ने विश्व को मानव मानव एक हैँ का संदेश दिया हैँ, जिसके बदौलत समाज की आन बान शान पहचान हैँ उसी को ख़त्म करने की साजिश बड़ी बुद्धिमता से रची जा रही हैँ,,समाज आज इसका विरोध नहीं करेंगे तो कल बहूत पछताना पड़ेगा,, जयंती पर्व को मात्र एक दिन मे समेट देना संभव ही नहीं हैँ, विशाल समाज हैँ और हर गांव गली क़स्बा नगर चौक मे गुरू घासीदास जयंती मनाते हैँ, जिससे सभी एक दूसरे के कार्यक्रम मे आते जाते हैँ, आपसी प्रेम सहयोग बढ़ता हैँ, सामाजिक समनवय बढ़ता हैँ, गैर सतनामी को अतिथि बनाकर सम्मान देते हैँ जिससे उनके साथ की दूरिया मिटती हैँ, जयंती पर्व से समाज की मूल कला संस्कृति पंथी नृत्य सतनाम गीत भजन निखरता हैँ, नए नए कलाकार पैदा होते हैँ, समाज के लाखो कलाकारों को रोजगार मिलता हैँ, समाज मे नए लीडरशिप निकलते हैँ,और समाज की एकता ताक़त स्पस्ट दिखाई देती हैँ, जिसको समाज के भीतर पनप रहे समाज द्रोही लोग ख़त्म करने मे जुट गये हैँ, समाज सुधार के नाम पर पुरे जयंती पर्व को ही ख़त्म करना चाह रहे हैँ,,यह पूरी तरह से गलत और अव्यवहारिक निर्णय हैँ,,ख़त्म करना हैँ तो समाज मे फैली हुई तमाम बुराई को ख़त्म करो, नशा पान, शराब खोरी को बंद करो, अभद्रता को बंद करो, आज सतनामी समाज के लोग अन्य समाज या धर्म मे पलायन कर रहे हैँ उसे रोको, उस बैठक मे उपस्थित तमाम बुद्धिजीवि/ संगठन से पूछना चाहता हूं कि आपको जयंती मे कार्यक्रम प्रोग्राम बंद करने का इतना ही शौक है तो छत्तीसगढ़ में समस्त सतनामी समाज को हिंदू देवी देवता के पूजा पाठ करना बंद करो,जितना भी तीज त्यौहार उसे मनाना बंद करो,। आज बहुतायत सतनामी समाज मांस मछली मुर्गा अंडा दारू में मदमस्त है उसे बंद करो, समाज मे शिक्षा की कमी को दूर करो ना,, हर ब्लॉक तहसील जिला मे निःशुल्क कोचिंग सेंटर खोलो,, बेरोजगार को रोजगार दिलाओ, गरीबो का सहारा बनो,आज सभी राजनीतिक दल में सतनामी समाज बटा हुआ है सभी सतनामी को एक ही पार्टी में लाओ न। ऐसे काम करने के लिए आपके पास समय नहीं है आपके पास सोच नहीं हैँ, आपके पास विजन नहीं हैँ,केवल कार्यकम प्रोग्राम बंद करने से ही समाज सुधर जायेगा क्या?, आज क्यों 50%सतनामी जेल मे बंद हैँ या मुकदमे चल रहे हैँ उस पर विचार करो,। गुरुघासीदास के अमर वाणी को पंथी नृत्य सतनाम भजन लोकगीत संगीत के माध्यम से विश्व भर मे फैलाने का काम केवल कलाकारों ने किया हैँ,आज कलाकार कलाकारी करना बंद कर दे तो समाज सुना हो जायेगा, कोई नाम लेने वाला नहीं बचेगा,, आप लोगो को तो बाहर मे जय सतनाम कहने मे भी लाज लगती हैँ, कलाकार खुलेआम सीना चौड़ीकर मंच से जय सतनाम कहता हैँ,आज सतनामी समाज के बीच में गैर सतनामी कलाकार 50% घुस के प्रोग्राम कर रहा है किन्तु समाज मे पैदा हुए बड़े बड़े कलाकार को प्रोग्राम नहीं मिलता,बड़े बड़े कलाकार घर बैठे रहते हैँ, अन्य समाज के कलाकार को लाखो रुपया दे रहे हो,इसके बारे में विचार /विरोध क्यों नहीं करते आप लोग । उसका प्रतिबंध क्यों नहीं लगाते,।आज सतनामी समाज के सभी कलाकार समाज के बीच में जाकर बाबा जी के पंथी मंगल भजन गा रहे हैं और समाज को जगा रहा है संदेश दे रहे हैं तो आपको खटक रहे हैं, ऐसे छोटे छोटे सोच वाले संगठन/ और उपस्थित लोगो की हम कड़ी निंदा करते हैँ , यह समाज सेवा के नाम पर कलंक हैँ,इसका पूरी तरीका से विरोध करते है । यदि आप में सामाजिक सोच है तो सतनामी समाज इतने ज्यादा टुकड़ो मे बंटे हुए हो इसे एक करो,एक सादा झंडा के नीचे रहो । छत्तीसगढ़ में सिर्फ कलाकार ही है जो आज बाबा गुरु घासीदास को पूरा विश्व लेवल में जनवाने का काम किया है।ये कलाकारों की देन है।प्रोग्राम बंद करने वाले संगठन का समाज मे क्या क्या योगदान हैँ,,कहां रहता है। सभी अपने स्वार्थ की सोच मैं डूबे रहते हैँ , जनता जागरूक हैँ,आपकी जागीर नहीं है, जनता आजाद है,आजाद देश का नागरिक है, आपका थोपा हुआ नियम स्वीकार्य नहीं हैँ, इस गलत निर्णय पर तुरंत रोक लगाया जाये अन्यथा प्रदेश भर मे कड़ा से कड़ा विरोध किया जावेगा,
जय सतनाम

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