अटल बिहारी वाजपेयी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में
फरीदाबाद, मई। फरीदाबाद स्थित श्री अटल बिहारी वाजपेयी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है।डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) की तरफ़ से आरटीआई के माध्यम से हुए चौंकाने वाले खुलासे में सामने आया है कि वर्ष 2020 से अब तक इस संस्थान को 200 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम फंडिंग प्राप्त हुई है।इसके बावजूद, कॉलेज की वर्तमान स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक बनी हुई है। एक स्वास्थ्य एवं शिक्षण संस्थान के लिए अनिवार्य मानी जाने वाली बुनियादी सुविधाएँ तक यहाँ नदारद हैं, विश्वसनीय बिजली बैकअप प्रणाली का अभाव, अलग शैक्षणिक/अस्पताल भवन का कोई निर्माण नहीं, आवश्यक दवाइयों और उपकरणों की कमी, छात्रों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं, खराब वायरिंग के कारण लगातार बिजली कटौती स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई, जब इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आता, तो यह केवल सिस्टम की कमी ही नहीं बल्कि संभावित भ्रष्टाचार (Possible Corruption) की ओर भी इशारा करता है। डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने इसे हरियाणा सरकार की बड़ी विफलता करार दिया है।उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज़ और साक्ष्य राज्य एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपे जाएंगे। साथ ही,उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी से इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि: आखिर 200 करोड़ का बजट कहां और कैसे खर्च हुआ, किन अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध है, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ व्यास ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाने को बाध्य होगा।यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है।