तिनसुकिया जिले में 'नोटा' (NOTA) के प्रति बढ़ता रुझान
सैखोवाघाट:-तिनसुकिया जिले में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के परिणामों ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। जहाँ एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिले की सभी सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही है, वहीं दूसरी ओर 'नोटा' (None of the Above) के वोटों में हुई भारी वृद्धि ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में, भाजपा ने ८२ नंबर दुमदुमा विधानसभा क्षेत्र में ५५,३८३ मतों के अंतर से आसान जीत हासिल की। लेकिन इसी निर्वाचन क्षेत्र में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जहाँ सर्वाधिक ४,८६४ मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। यह संख्या तिनसुकिया जिले के सभी छह निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक है।दुमदुमा निर्वाचन क्षेत्र में २०१६ में ३,३१७ और २०२१ में ३,१८६ मतदाताओं ने नोटा दबाया था, जो इस बार बढ़कर ४,८६४ हो गया। जिले के अन्य क्षेत्रों की स्थिति इस प्रकार रही:
सदिया: २०१६ में २,०४४, २०२१ में १,९१८ और २०२६ में २,६४५ वोट।
तिनसुकिया: २०१६ में १,९८६, २०२१ में २,५३९ और २०२६ में २,४०७ वोट।
मार्घेरिटा: २०१६ में २,१३७, २०२१ में २,५३६ और २०२६ में २,६९७ वोट।
डिगबोई: २०१६ में २,२४६, २०२१ में २,७३३ और २०२६ में २,६९७ वोट।
माकुम (नवनिर्मित): अपने पहले ही चुनाव में ३,०४७ मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया, जो काफी महत्वपूर्ण है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'नोटा' का बढ़ता ग्राफ मतदाताओं की नकारात्मक अभिव्यक्ति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नोटा के प्रति बढ़ती यह रुचि इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दल उपयुक्त और स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने में विफल हो रहे हैं।
"नोटा के बढ़ते आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जनता वर्तमान उम्मीदवारों से असंतुष्ट है। अब देखना यह होगा कि भविष्य में राजनीतिक दल सजग होकर उम्मीदवारों का चयन करेंगे या पुरानी 'लॉबिंग' पद्धति पर ही टिके रहेंगे।"