नहीं है इतनी आसान जिंदगी
उलझती-सुलझती,
फिर उलझती रही है जिंदगी
स्वेटर-सी बुनती-उधड़ती,
फिर बुनती रही है जिंदगी
कभी ठंडी हवा का झोंका-सा
तो कभी तूफ़ानों से घिरी रही जिंदगी
कभी बहुत आसान, तो कभी
परीक्षा का सबसे कठिन सवाल रही जिंदगी
लूडो बहुत पसंद थी मुझे
मगर सॉंप-सीढ़ी-सी रही जिंदगी
कभी मिल जाए अगर तू मुझको कहीं
करने हैं तुझसे कुछ संवाद ऐ जिंदगी
मैं हूँ परेशान, मेरे कैनवास पर
कोई और रंग भर रहा है जिंदगी
सुना था, मान भी लिया
तू नहीं है इतनी आसान जिंदगी
यत्नों-प्रयत्नों से जिया है तुझको
न दे कोई ईनाम, पर प्रतिफल की हकदार तो
मैं हूँ न ऐ जिंदगी
गुरदीप कौर
मुरादाबाद (उ.प्र.)