झारखंड में 10 साल से बंट रहा अमानक नमक, लैब रिपोर्ट में आयोडीन चार गुना कम
रांची: झारखंड में जन वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीबों को पिछले 10 सालों से बांटे जा रहे नमक की गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान लगा है। एक लैब जांच में यह खुलासा हुआ है कि बांटे जा रहे नमक में आयोडीन की मात्रा बेहद कम है, जिससे यह उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है।
प्रमुख बिंदु:
आयोडीन की मात्रा में भारी कमी: नमक के पैकेट पर आयोडीन की मात्रा 20 से 30 PPM (पार्ट्स पर मिलियन) लिखी होती है, जबकि जांच में यह मात्र 5.09 PPM ही निकली।
गुणवत्ता और अशुद्धियाँ: नमक में कंकड़-पत्थर मिले हैं और यह पानी में पूरी तरह घुलता भी नहीं है।
महालेखाकार की ऑडिट में भी पुष्टि: विधानसभा की विशेष जांच समिति और महालेखाकार कार्यालय की ऑडिट टीम ने पहले ही इस अनियमितता को पकड़ लिया था, फिर भी पिछले 10 सालों से राज्य में इसका वितरण जारी है।
वितरण में बड़ा खेल: राज्य सरकार 11.05 रुपये प्रति किलो की दर से नमक खरीदती है, लेकिन वह गरीबों तक नहीं पहुँच रहा है। इसे सरकारी बोरियों से बदलकर खुले बाजार में मात्र 5 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जा रहा है।
फर्जीवाड़ा और कालाबाजारी: डीलर्स लाभार्थियों का अंगूठा लगवाकर कागजों में 90 से 95 प्रतिशत नमक का वितरण दिखा रहे हैं, जबकि असल में यह सड़क किनारे के ढाबों और पशुओं के खटालों तक खपाया जा रहा है।
खाद्य आपूर्ति मंत्री ने इस पुराने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।